उस्मान हादी के लिए न्याय की मांग: बांग्लादेश में ‘इंकलाब मंच’ का मार्च फॉर जस्टिस शुरू
Usman Haadi Murder: बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के खिलाफ 'इंकलाब मंच' ने 3 से 6 जनवरी तक 'मार्च फॉर जस्टिस' का ऐलान किया है। संगठन ने 7 जनवरी तक हत्यारों पर चार्जशीट दाखिल करने की मांग की है।
- Written By: प्रिया सिंह
उस्मान हादी के लिए न्याय की मांग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Inqilab Manch March For Justice 2026: बांग्लादेश में क्रांतिकारी छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या को लेकर जनाक्रोश एक बार फिर सड़कों पर उतर आया है। जन-सांस्कृतिक संगठन ‘इंकलाब मंच’ ने आज यानी 3 जनवरी से 6 जनवरी तक देशव्यापी ‘मार्च फॉर जस्टिस’ निकालने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। संगठन ने अंतरिम सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए 7 जनवरी तक हत्यारों की पहचान करने और चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा तय की है। हादी की हत्या ने देश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, जिससे एक बार फिर बड़े नागरिक आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है।
उस्मान हादी की हत्या का सच
पिछले साल जुलाई आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे शरीफ उस्मान हादी की 12 दिसंबर 2025 को ढाका के बिजॉय नगर में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इलाज के दौरान 18 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया, जिसके बाद से ही उनके समर्थक न्याय की गुहार लगा रहे हैं। हादी उस आंदोलन के महत्वपूर्ण रणनीतिकार थे जिसने शेख हसीना सरकार को सत्ता से बेदखल करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
इंकलाब मंच की सरकार को चेतावनी
संगठन के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने ढाका के शाहबाग इलाके में रैली को संबोधित करते हुए अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर सरकार हत्यारों की पहचान और जांच प्रक्रिया में तेजी नहीं लाती, तो आंदोलन अपने सबसे उग्र और अंतिम चरण में प्रवेश कर जाएगा। मंच का कहना है कि जो प्रशासन अपने नागरिकों को सुरक्षा और न्याय नहीं दे सकता, उसे सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है।
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देशव्यापी मार्च और जनसमर्थन
‘मार्च फॉर जस्टिस’ के माध्यम से इंकलाब मंच अब दूर-दराज के इलाकों में जाकर आम जनता और अन्य राजनीतिक दलों को अपने साथ जोड़ने की योजना बना रहा है। इस मार्च का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है ताकि जांच को ठंडे बस्ते में न डाला जाए और अपराधियों को सख्त सजा मिले। संगठन के नेताओं ने खुफिया एजेंसियों की विफलता पर भी सवाल उठाए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर उंगलियां उठ रही हैं।
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राजनीतिक स्थिरता पर गहराता संकट
बांग्लादेश में इस नए घटनाक्रम ने अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और विपक्षी दलों को भी सक्रिय कर दिया है। अगर 7 जनवरी की समय सीमा तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो ढाका सहित पूरे देश में हिंसक प्रदर्शनों और सड़क जाम होने की प्रबल संभावना है। यह स्थिति बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर अनिश्चितता और भारी अस्थिरता के दौर में धकेल सकती है।
