बांग्लादेश चुनाव 2026 (सोर्स-सोशल मीडिया)
Social Media Manipulation In Bangladesh: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों के लिए प्रचार अब अपने सबसे चरम और डिजिटल रूप में पहुंच चुका है। इस बार चुनावी रैलियों से कहीं ज्यादा चर्चा सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तैयार किए गए फर्जी वीडियो की हो रही है। बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी जैसे प्रमुख दल एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए उन्नत तकनीक और क्रिकेट की भावनाओं का सहारा ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन चुनावों में जनता के बुनियादी मुद्दों के बजाय भारत विरोधी भावनाएं और डिजिटल दुष्प्रचार मुख्य केंद्र बन गए हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान बांग्लादेश का सोशल मीडिया अब पूरी तरह से AI द्वारा तैयार की गई सामग्रियों और फर्जी खबरों से भर गया है। इंडिया टुडे की जांच में कम से कम सात ऐसे सोशल मीडिया चैनलों की पहचान की गई है जो AI वीडियो के जरिए तेजी से झूठ फैला रहे हैं। ये AI वीडियो देखने में इतने असली लगते हैं कि आम मतदाताओं के लिए असली और नकली सूचना के बीच का अंतर कर पाना बहुत मुश्किल है।
राजनीतिक दलों ने क्रिकेट को एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए टी20 वर्ल्ड कप की हार को राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ दिया है। जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों का दावा है कि उनकी सरकार आने पर बांग्लादेश को वैश्विक स्तर पर क्रिकेट में फिर से गौरव और सम्मान मिलेगा। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं जिनमें यह वादा किया गया है कि जमात के नेतृत्व वाली सरकार ही देश को वर्ल्ड कप जिताएगी।
चुनाव विश्लेषण में यह साफ हुआ है कि राजनीतिक दल मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए भारत विरोधी भावनाओं का जमकर फायदा उठा रहे हैं। नेशनल सिटीजन पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में भारत का सीधा नाम लेते हुए सीमा पर हत्याओं और जल विवादों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। पार्टी समर्थकों द्वारा भारतीय मैचों के बहिष्कार की मांग की जा रही है और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद में भारत के दबदबे का कड़ा विरोध हो रहा है।
जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी एक-दूसरे की छवि खराब करने के लिए AI अवतारों और डीपफेक तकनीक का भरपूर सहारा ले रही हैं। जमात विरोधी अभियान में AI पात्रों के जरिए यह दावा किया जा रहा है कि यह पार्टी बांग्लादेश के बजाय पाकिस्तान के प्रति अधिक वफादार है। वहीं कुछ वीडियो में बीएनपी नेताओं पर भारतीय जांच एजेंसी ‘रॉ’ के अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें करने के झूठे और षड्यंत्रकारी आरोप लगाए गए हैं।
अवामी लीग पर फिलहाल चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा दिया गया है और उनकी नेता शेख हसीना वर्तमान में नई दिल्ली में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश की अदालत ने हसीना को मौत की सजा सुनाई है लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार वह दिल्ली से ही अपनी पार्टी की गुप्त बैठकें कर रही हैं। अवामी लीग के कुछ समर्थक गुटों ने अब डिजिटल अभियान चलाकर 12 फरवरी के इन चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार करने की खुली अपील की है।
गूगल के सिंथआईडी जैसे टूल्स के विश्लेषण से पता चला है कि इंटरनेट पर फैले अधिकांश सनसनीखेज दावे तकनीकी रूप से पूरी तरह निर्मित और झूठे हैं। राजनीतिक दल इन डीपफेक वीडियो का उपयोग करके जबरन वसूली और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों को अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव आयोग के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती इन डिजिटल अफवाहों को रोकने और एक निष्पक्ष चुनाव वातावरण तैयार करने की बनी हुई है।
यह भी पढ़ें: Karyna Shuliak कौन हैं? जिन्हें जेफरी एपस्टीन की वसीयत मिलने वाले थे 50 मिलियन डॉलर
बीएनपी नेता तारिक रहमान ने अपने घोषणापत्र में प्रस्ताव दिया है कि भविष्य में किसी भी प्रधानमंत्री का कार्यकाल 10 साल से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने फरक्का बैराज के विकल्प के रूप में पद्मा बैराज के निर्माण का प्रस्ताव देकर भारत के प्रति अपने कड़े राजनीतिक रुख का संकेत दिया है। दूसरी ओर नेशनल सिटीजन पार्टी शेख हसीना को न्याय के कटघरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कानूनी रास्ता अपनाने की बात कर रही है।