नए प्रधानमंत्री बनेंगे तारिक रहमान (सोर्स-सोशल मीडिया)
BNP Wins Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में BNP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। जनता ने कट्टरपंथी विचारधारा को नकारते हुए विकास के पक्ष में मतदान किया है। तारिक रहमान ने दो सीटों से जीत हासिल कर अपनी ताकत दिखाई है। अब देश में करीब बीस साल बाद BNP की सरकार बनने जा रही है।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार BNP ने अब तक 151 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट भी BNP की इस बड़ी जीत और सत्ता में वापसी की पुष्टि करती है।
शुरुआती अनौपचारिक नतीजों के अनुसार 299 में से 204 सीटों की गिनती पूरी हो चुकी है। इन नतीजों में BNP गठबंधन 158 सीटों पर आगे है या जीत दर्ज कर चुका है। यह रुझान स्पष्ट करते हैं कि देश में BNP की सरकार बनना अब लगभग तय है।
BNP प्रमुख बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने बोगरा सीट से बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने बोगरा में 2,16,284 वोट हासिल किए और अपनी लोकप्रियता का लोहा देश में मनवाया है। रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों ही महत्वपूर्ण सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया है।
BNP ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि सत्ता मिलने पर तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अवामी लीग के समर्थकों से भी समर्थन देने की अपील की थी। रुझानों से पता चलता है कि अवामी लीग के पारंपरिक वोट भी BNP को मिले हैं।
कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी इस चुनाव में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरती हुई दिखाई दे रही है। रुझानों के मुताबिक जमात ने अब तक 43 सीटों पर बढ़त बनाई है जो काफी कम है। जनता ने कट्टरपंथी गठबंधन को दरकिनार कर BNP पर अपना पूरा भरोसा जताया है।
देश की जनता ने कट्टरपंथियों की जमात को पूरी तरह से नकारने का फैसला किया है। भारत विरोधी रवैया रखने वाली जमात-ए-इस्लामी का 11 दलों का गठजोड़ BNP से हार गया है। देश में करीब 20 साल बाद खालिदा जिया की पार्टी सत्ता में आ रही है।
मतदान के दौरान खुलना जैसे इलाकों में छिटपुट हिंसा और झड़प की खबरें भी सामने आई हैं। खुलना में हुई झड़प के दौरान BNP के एक नेता की दुखद मौत होने की जानकारी मिली है। BNP का आरोप है कि धक्का लगने से उनकी जान गई जबकि जमात ने इसे बीमारी बताया।
गोपालगंज के एक स्कूल में हैंडबम हमला हुआ जिसमें एक 13 साल की बच्ची घायल हुई है। इस हमले में कुल तीन लोग और चुनाव ड्यूटी में लगे दो सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए। मतदान के दिन कई इलाकों से झड़प की खबरें आती रहीं लेकिन मतदान जारी रहा।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इन चुनावों को पूरी तरह से एक सुनियोजित तमाशा करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि देश में निष्पक्ष चुनाव तटस्थ कार्यवाहक सरकार की देखरेख में होने चाहिए। हसीना के अनुसार अवामी लीग की गैरमौजूदगी में यह चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है।
उन्होंने कहा कि यह मतदान मतदाताओं के अधिकारों की पूरी तरह से अनदेखी करने वाला कदम है। अवामी लीग इस बार अपने पारंपरिक चुनाव चिन्ह के बिना चुनावी मैदान में उतरी हुई थी। हसीना ने अंतरिम सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की और इसे दिखावा बताया।
चुनावों के साथ ही देश में संवैधानिक सुधारों को लेकर एक जनमत संग्रह भी कराया गया था। इसमें दो तिहाई मतदाताओं ने सुधारों के पक्ष में अपनी राय दी और बदलाव का समर्थन किया। अंतरिम प्रशासन ने इन सुधारों को भविष्य की शासन व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया है।
अधिकारियों के अनुसार इन सुधारों का मुख्य मकसद शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव लाना है। इसके जरिए देश के संस्थागत ढांचे को और भी अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा। मतदाताओं ने इस एजेंडे को अपना समर्थन देकर बदलाव की राह प्रशस्त कर दी है।
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भारत सरकार ने इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में खुद को किसी भी हस्तक्षेप से दूर रखा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने पर्यवेक्षक भेजने के निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया था। भारत का मानना है कि चुनाव की विश्वसनीयता का फैसला बांग्लादेश की जनता को ही करना चाहिए।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का हमेशा समर्थक रहा है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह के हस्तक्षेप के आरोपों से बचना चाहता है। इसीलिए भारत ने इस चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए अपना कोई दल नहीं भेजा।