बीएनपी को भारत विरोधी और चीन का करीबी माना जाता है (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bangladesh Election Result 2026: बांग्लादेश के आम चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत मिलने के बाद दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होता दिखाई दे रहा है। यह बदलाव केवल ढाका की सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है। पिछले डेढ़ दशक में अवामी लीग के शासन में दोनों देशों के बीच सहयोग का स्तर अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया था। ऐसे में BNP सरकार के आने से नीतियों के पुनर्संतुलन की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि BNP पारंपरिक रूप से भारत के प्रति तटस्थ सख्त या अधिक संतुलित रुख अपनाती रही है। इसलिए नई सरकार अपने घरेलू सहयोगियों को ध्यान में रखते हुए भारत के साथ संबंधों की समीक्षा कर सकती है। हालांकि, यह भी उतना ही सच है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते केवल राजनीतिक पार्टियों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे भौगोलिक, आर्थिक और ऐतिहासिक आवश्यकताओं से भी संचालित होते हैं।
सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के संबंधों की रीढ़ रहा है। सीमा पार आतंकवाद, उग्रवाद और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पिछले दशकों में समन्वय मजबूत हुआ है। यदि बीएनपी सरकार इस सहयोग को जारी रखती है, तो क्षेत्रीय स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर घरेलू राजनीतिक दबावों के चलते सुरक्षा सहयोग में ढील आती है, तो इसका असर भारत के पूर्वी राज्यों और सीमा क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
एक महत्वपूर्ण पहलू “चीन कारक” भी है। बीएनपी सरकार चीन के साथ आर्थिक और आधारभूत ढांचे सहयोग को और गहराई करने की कोशिश कर सकती है। ऐसे में बांग्लादेश भारत और चीन के बीच संतुलन की नीति अपनाएगा। भारत के लिए यह जरूरी होगा कि वह प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और विश्वास निर्माण पर ध्यान दे। बंदरगाह, रेल, सड़क और ऊर्जा परियोजनाओं में विस्थापन और सहयोग लाभ सुनिश्चित करना दोनों पक्षों के हित में होगा।
व्यापार और समन्वय के क्षेत्र में भी नई सरकार की प्राथमिकताएं अहम जरूरतमंद। भारत बांग्लादेश का प्रमुख व्यापारिक प्रतिष्ठान है, लेकिन व्यापार संतुलन का मुद्दा समय-समय पर उठ रहा है। यदि भारत बांग्लादेशी उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देता है और संयुक्त निवेश परियोजनाओं को बढ़ावा देता है, तो आर्थिक रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं। तीस्ता जल बंटवारे जैसे चुनावों पर प्रगति दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बेहतर संबंधों के लिए दोनों देशों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा। भारत को नई सरकार के जनादेश का सम्मान करते हुए शीघ्र सकारात्मक संवाद स्थापित करना चाहिए और आंतरिक राजनीति से दूरी बनाए रखनी चाहिए। वहीं बांग्लादेश को भी सुरक्षा सहयोग जारी रखते हुए क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी होगी। जन-से-जन संपर्क, शिक्षा, संस्कृति और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना दीर्घकालिक संबंधों की मजबूत नींव बन सकता है।
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अंततः, बीएनपी की जीत से संबंधों में एक नया संतुलन अवश्य आएगा, लेकिन टकराव की संभावना अनिवार्य नहीं है। यदि दोनों देश व्यावहारिक और दूरदर्शी नीति अपनाते हैं, तो यह परिवर्तन चुनौती के साथ-साथ एक अवसर भी साबित हो सकता है। दक्षिण एशिया की स्थिरता और समृद्धि के लिए भारत और बांग्लादेश का सहयोग भविष्य में भी निर्णायक बना रहेगा।