प्रियंका चतुर्वेदी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Priyanka Chaturvedi On Bangladesh Election: शिवसेना (यूबीटी) की फायरब्रांड सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बांग्लादेश के हालिया चुनावी घटनाक्रम और भारत की आंतरिक राजनीति को लेकर बड़े बयान दिए हैं। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने एक तरफ पड़ोसी देश बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली की उम्मीद जताई, वहीं दूसरी तरफ भारतीय संसद के हालिया सत्र को संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करार दिया।
बांग्लादेश के चुनावों में तारिक रहमान की जीत और उनकी नई जिम्मेदारी पर खुशी जाहिर करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि मैं तारिक रहमान को इस बड़ी जीत पर शुभकामनाएं देती हूं। बांग्लादेश ने एक लंबे संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। मुझे पूरी उम्मीद है कि वह देश में पूर्ण लोकतंत्र बहाल करेंगे और भारत के साथ हमारे पुराने व मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।
चतुर्वेदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि भारत को उम्मीद है कि नई सरकार पाकिस्तान जैसे देशों के नकारात्मक प्रभाव से दूर रहेगी, जिससे दक्षिण एशिया में शांति बनी रहे। उन्होंने भरोसा जताया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंध फिर से गति पकड़ेंगे।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ प्रियंका चतुर्वेदी ने घरेलू राजनीति और संसद के कामकाज पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए संसद सत्र की आलोचना करते हुए इसे ‘इतिहास का सबसे दागदार सत्र’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान हर लोकतांत्रिक नियम का उल्लंघन किया गया और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की गई।
चतुर्वेदी ने कहा कि संसद में विपक्ष के नेता (LoP) को बोलने नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री ने महिला सांसदों पर अनुचित आरोप लगाए और स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जैसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियां पैदा हुईं। उन्होंने आगे कहा कि एक सांसद द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा बेहद शर्मनाक थी। पूर्व सेना प्रमुख की किताब पर एफआईआर दर्ज करने के मामले को भी उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया।
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प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार से जवाबदेही मांगते हुए कहा कि पिछले बजट की घोषणाओं का क्या हुआ, इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी बजट सत्र में केवल घोषणाएं नहीं होंगी, बल्कि संसदीय समितियां आवंटित धनराशि के सही उपयोग पर व्यापक चर्चा करेंगी।