बांग्लादेश चुनाव: शेख हसीना ने यूनुस सरकार को घेरा, कहा- ‘लाखों लोगों का मताधिकार छीनना लोकतंत्र की हत्या’
Bangladesh Election: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर लाखों समर्थकों का मताधिकार छीनने और देश को अस्थिर करने का गंभीर आरोप लगाया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
शेख हसीना, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Sheikh Hasina On Bangladesh Election: बांग्लादेश की अपदस्थ नेता शेख हसीना ने देश में आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत में रह रही पूर्व प्रधानमंत्री ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि लाखों लोगों के मताधिकार को जानबूझकर छीना गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश 12 फरवरी, 2026 को होने वाले अपने सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी कर रहा है।
अवामी लीग पर प्रतिबंध और हसीना की चेतावनी मोहम्मद यूनुस की सरकार ने शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग को चुनावों में भाग लेने से रोक दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हसीना ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) को भेजे एक ईमेल में चेतावनी दी कि समावेशी और निष्पक्ष चुनावों के बिना बांग्लादेश लंबे समय तक अस्थिरता का शिकार बना रहेगा।
लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को चुनाव से बाहर रखकर सरकार ने जानबूझकर लाखों समर्थकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। हसीना के अनुसार, जब आबादी के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से वंचित किया जाता है, तो इससे संस्थानों की वैधता खत्म होती है और भविष्य में विभाजन की स्थिति पैदा होती है।
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चुनाव की रूपरेखा और अंतरराष्ट्रीय नजर
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले इस चुनाव में 127 मिलियन से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं। यह 2024 के उस विद्रोह के बाद पहला चुनाव है जिसमें शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। अंतरिम सरकार न केवल चुनाव की निगरानी कर रही है, बल्कि व्यापक राजनीतिक सुधारों पर एक संवैधानिक जनमत संग्रह भी आयोजित कर रही है। चुनाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ सहित लगभग 500 विदेशी पर्यवेक्षकों को आमंत्रित किया गया है।
यूनुस सरकार का पक्ष और चुनौतियां
यूनुस के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा बल शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करेंगे और किसी भी हिंसा या जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, देश के भीतर मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। इसके अतिरिक्त, प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों पर दर्ज आपराधिक मामलों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े किए हैं।
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प्रमुख दावेदार और विपक्षी समीकरण
इस चुनावी समर में BNP तारिक रहमान के नेतृत्व में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं, 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर में स्वदेश लौटे हैं। वहीं, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन भी एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में सामने आया है।
