Bangladesh Election: कट्टरपंथी जमात और NCP के बीच हुआ गठबंधन, जानें कितने सीटों पर लड़ेंगे ‘भारत विरोधी’ दल
Bangladesh Election News: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों के लिए कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और छात्र आंदोलन की पार्टी NCP ने गठबंधन कर 253 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
जमात और NCP के बीच हुआ गठबंधन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Election Latest News In Hindi: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों के लिए विपक्षी ध्रुवीकरण साफ दिखने लगा है। बुधवार को ढाका में हुई एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमात-ए-इस्लामी के नायब-ए-अमीर सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहेर ने घोषणा की कि उनका गठबंधन 253 सीटों पर चुनाव लड़ेगा।
इस समझौते के तहत सबसे बड़ा हिस्सा जमात-ए-इस्लामी के पास गया है, जो 179 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। वहीं, छात्र आंदोलन से उभरी नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) को 30 सीटें दी गई हैं।
छोटे दलों की क्या है हिस्सेदारी?
इस गठबंधन में कई अन्य इस्लामिक और छोटे दल भी शामिल हैं। ममुनुल हक के नेतृत्व वाली बांग्लादेश खेलाफत मजलिस को 20 सीटें, खेलाफत मजलिस को 10 लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को 7 और एबी पार्टी को 3 सीटें आवंटित की गई हैं। इसके अलावा, निज़ाम-ए-इस्लामी पार्टी और बांग्लादेश डेवलपमेंट पार्टी को 2-2 सीटें मिली हैं।
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हालांकि, एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब गठबंधन की सहयोगी इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (IAB) ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार कर दिया। इसके बावजूद, गठबंधन ने रणनीतिक रूप से IAB के लिए 47 सीटें आरक्षित रखी हैं।
भारत विरोधी एजेंडा और राजनीतिक चुनौतियां
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जमात और NCP का साथ आना भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि ये दोनों ही पार्टियां अपने भारत विरोधी रुख के लिए पहचानी जाती हैं। वर्तमान में बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी है जिसके नेता तारिक रहमान हाल ही में देश लौटे हैं। अब मुख्य मुकाबला BNP और जमात-एनसीपी गठबंधन के बीच होने की उम्मीद है।
NCP में गठबंधन को लेकर भारी असंतोष
एनसीपी में आंतरिक कलह भले ही आधिकारिक तौर पर सीटों का बंटवारा हो गया हो लेकिन नाहिद इस्लाम की NCP के भीतर इस गठबंधन को लेकर भारी असंतोष है।
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रिपोर्ट के अनुसार, जमात जैसी कट्टरपंथी पार्टी के साथ जाने के फैसले के कारण पार्टी के 13 से अधिक केंद्रीय नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। युवा नेता तसनीम जारा ने इसे छात्र आंदोलन के मूल्यों के साथ धोखा बताते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अब यह चुनाव न केवल सत्ता का फैसला करेगा बल्कि यह भी तय करेगा कि छात्र आंदोलन से निकले युवा नेता कट्टरपंथी विचारधारा के साथ मिलकर देश को किस दिशा में ले जाते हैं।
