बांग्लादेश में भारतीय छात्रों में बढ़ा डर, अल्पसंख्यकों पर हमलों के बीच हॉस्टल में कैद रहने को मजबूर

Indian Students Bangladesh: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के कारण 9,000 से अधिक भारतीय छात्र डरे हुए हैं। रिपोर्ट में छात्रों की सुरक्षा के लिए 'शून्य सहनशीलता' की नीति अपनाने की मांग की गई है।
Indian Students in Bangladesh Live in Fear Amid Rising Violence and Attacks on Minorities
बांग्लादेश में भारतीय छात्रों में बढ़ा डर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Indian medical students fear Bangladesh violence: बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की लहर ने वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों के बीच गहरा डर पैदा कर दिया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कई छात्र सुरक्षा कारणों से अपने हॉस्टल के कमरों में कैद रहने को मजबूर हैं और अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। ढाका और अन्य शहरों में विदेशी छात्रों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन के खोखले आश्वासनों के बीच छात्र और उनके परिवार भारत सरकार से तत्काल सुरक्षा और विश्वसनीय हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं।

हॉस्टल बना छात्रों की जेल

यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में ढाका में पढ़ रहे करीम जैसे कई छात्रों की आपबीती सुनाई गई है जो असुरक्षा के कारण शाम होते ही खुद को कमरों में बंद कर लेते हैं। ये छात्र बाहर बाजारों में जाने या अपना असली लहजा दिखाने से भी बच रहे हैं ताकि किसी भी हिंसक भीड़ का शिकार न बनें। उनके लिए शिक्षा अब एक सतर्कता का अभ्यास बन चुकी है जहां हर आवाज पर उन्हें हमले का डर सताता रहता है।

आर्थिक मजबूरी और मेडिकल शिक्षा

वर्तमान में बांग्लादेश में 9,000 से अधिक भारतीय मेडिकल छात्र पढ़ाई कर रहे हैं जो वहां रोमांच के लिए नहीं बल्कि आर्थिक मजबूरी के चलते जाते हैं। भारत में सरकारी सीटों की कमी और निजी कॉलेजों की भारी फीस के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बांग्लादेश एक सस्ता विकल्प रहा है। यहां मेडिकल की पढ़ाई का खर्च भारत के निजी संस्थानों के मुकाबले लगभग आधा है जिससे यह हजारों परिवारों की पहली पसंद बना।

यूनिवर्सिटी प्रशासन का ढुलमुल रवैया

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बांग्लादेशी विश्वविद्यालयों को केवल कर्फ्यू लगाने तक सीमित रहने के बजाय अपने छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। विदेशी छात्रों के खिलाफ हिंसा के मामलों में 'शून्य सहनशीलता' की नीति अपनाना समय की मांग है ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। जब छात्र केवल अपने पासपोर्ट के कारण बाहर निकलने से डरने लगें तो यह उस देश की नैतिक हार का सबसे बड़ा संकेत होता है।

सुरक्षा के प्रति शून्य सहनशीलता

विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश को केवल आश्वासन देने के बजाय धरातल पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी ताकि छात्रों का विश्वास दोबारा बहाल हो सके। अगर जल्द ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में भारतीय छात्र वहां जाने से परहेज करेंगे जिससे शिक्षा क्षेत्र को बड़ा नुकसान होगा। भारत सरकार को भी कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाकर अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

भारत में सीटों की भारी कमी

भारत में हर साल 20 लाख से अधिक छात्र मेडिकल प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं लेकिन सरकारी कॉलेजों में सीटें मात्र 60,000 के आसपास ही हैं। यही कारण है कि छात्र पड़ोसी देशों की ओर रुख करते हैं जहां उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कम बजट में उपलब्ध हो जाती है। जब तक भारत में सीटों की संख्या और फीस के ढांचे में सुधार नहीं होता तब तक छात्र जान जोखिम में डालकर भी बाहर जाते रहेंगे।

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