तारिक रहमान ने भारत की पीठ पर घोंपा छुरा, मोंगला पोर्ट को लेकर चीन से मिला हाथ, सुरक्षा को लेकर बढ़ी टेंशन

Mongla Port Chinese Loan: बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण के लिए चीन से 335.78 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण समझौता किया है। इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों पर चर्चा तेज हुई है।
Bangladesh China Mongla Port Deal
बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट को लेकर चीन से समझौता किया(सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • चीन का एक्जिम बैंक 2 प्रतिशत ब्याज दर पर 20 साल के लिए कर्ज देगा।

  • परियोजना के तहत दो नए कंटेनर टर्मिनल और कार्गो हैंडलिंग यार्ड बनाए जाएंगे।

  • बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पहले मोंगला पोर्ट के पास प्रस्तावित भारतीय आर्थिक क्षेत्र रद्द किया था।

  • चीन की बढ़ती आर्थिक भागीदारी से क्षेत्रीय व्यापार और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर चर्चा तेज हुई है।

Bangladesh China Mongla Port Deal: बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने मोंगला पोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए चीन के साथ एक अहम समझौता किया है। इस समझौते के तहत बांग्लादेश को 335.78 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रियायती ऋण मिलेगा। करीब एक साल पहले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इसी बंदरगाह के पास प्रस्तावित भारतीय आर्थिक क्षेत्र की परियोजना रद्द कर दी थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऋण समझौते पर अब औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। बताया गया है कि समझौते को जून में तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। मोंगला पोर्ट बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और भारतीय सीमा से इसकी निकटता इसे क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।

क्या है चीन के साथ हुआ समझौता?

इस परियोजना के लिए बांग्लादेश सरकार और चीन के एक्जिम बैंक के बीच ऋण समझौता हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन यह कर्ज 2 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर देगा। इसे चुकाने के लिए बांग्लादेश को 20 साल का समय मिलेगा, जबकि शुरुआती पांच साल की अतिरिक्त रियायती अवधि भी दी जाएगी।

इस धनराशि का इस्तेमाल मोंगला पोर्ट पर दो नए कंटेनर टर्मिनल और कार्गो हैंडलिंग यार्ड बनाने में किया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य बंदरगाह की क्षमता बढ़ाना, माल की आवाजाही को बेहतर बनाना और व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार करना है।

Bangladesh China Mongla Port Deal
भारत में प्रदर्शन के पीछे इस्लामी ताकतें! अमेरिकी पत्रकार ने दी चेतावनी, लाखों डॉलर की फंडिंग का दावा

भारतीय आर्थिक क्षेत्र की परियोजना क्यों हुई थी रद्द?

चीन के साथ हुए इस समझौते की तुलना बांग्लादेश की उस पूर्ववर्ती योजना से की जा रही है, जिसके तहत मोंगला पोर्ट के पास 110 एकड़ जमीन पर भारतीय आर्थिक क्षेत्र विकसित किया जाना था।

बताया जाता है कि 2015 में हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत इस परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई थी। भारत सरकार ने इसके विकास के लिए हीरानंदानी समूह की सहायक कंपनी इविटा कंस्ट्रक्शंस को नियुक्त किया था। हालांकि, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने परियोजना में देरी का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया।अब उसी बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए चीन से ऋण लेने के फैसले ने भारत-बांग्लादेश आर्थिक संबंधों और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव की वजह?

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंध कई मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे हैं। इनमें शेख हसीना का भारत में रहना और उनके प्रत्यर्पण की बांग्लादेश की मांग प्रमुख हैं।

ढाका लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है, जबकि भारत ने कहा है कि इस मामले पर लागू कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जाएगा। इस मुद्दे के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और राजनीतिक संबंधों को लेकर भी कई सवाल उठते रहे हैं।

बढ़ सकती है भारत की चिंता

मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण में चीन की वित्तीय भागीदारी बांग्लादेश के बुनियादी ढांचे में उसकी मौजूदगी बढ़ा सकती है। भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बांग्लादेश उसके निकटवर्ती पड़ोस में स्थित है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक तथा सुरक्षा संबंध लंबे समय से अहम रहे हैं।

Bangladesh China Mongla Port Deal
आतंकवाद पर भारत की दो टूक! मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में शामिल करने की मांग, यूएन से दुनिया को संदेश

हालांकि, केवल इस ऋण समझौते के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि बांग्लादेश ने भारत से रणनीतिक दूरी बनाने का अंतिम फैसला कर लिया है। बंदरगाह के विकास, आर्थिक जरूरतों और विदेशी निवेश से जुड़े फैसलों का आकलन व्यापक क्षेत्रीय परिस्थितियों के संदर्भ में करना होगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com