

Highlights
भारत ने आतंकवाद को लेकर एक बार फिर सक्त टिप्पणी की है
संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी गतिविधि को लेकर सख्त पैमाना तय करने की मांग
अपराध को रोकने, जांच करने के लिए सिस्टम बनाने की बात कही गई
भारत के द्वारा उठाए गए कदमों से दुनिया को अवगत कराया गया
Indian Stand On Terrorism: भारत ने एक बार फिर आतंकवाद को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवादी गतिविधियां को लेकर सख्त पैमाने तय की जानी चाहिए। और इसे मानवता के खिलाफ अपराध के दायरे में ठीक से शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, भारत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे अपराधों को रोकने, उनकी जांच करने और राष्ट्रीय कानूनी व न्यायिक प्रणालियों के जरिए उन पर मुकदमा चलाने की मुख्य जिम्मेदारी देशों की है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति के 81वें सत्र में यह बयान दिया। यह सत्र मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सजा पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से जुड़ा था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की ओर से एक्स पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, भारत के बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि तय पैमाने पर आने वाली आतंकवादी गतिविधियों को मानवता के खिलाफ अपराध के दायरे में उचित रूप से मान्यता दी जाए।
भारत ने देश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में दखल न देने के सिद्धांत का सम्मान करते हुए क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही। बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मानवता के खिलाफ अपराधों पर कोई भी नया कन्वेंशन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनी तंत्र के अनुसार होना चाहिए, न कि उनकी नकल और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों को बस नए कन्वेंशन में शामिल करने का विरोध किया गया।
भारत ने मानवता के खिलाफ अपराधों को रोकने और सजा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करने की कोशिशों के तहत अंतरराष्ट्रीय कानून के व्यापक रूप से स्वीकृत सिद्धांतों, मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं और पारदर्शी व समावेशी बातचीत की जरूरत पर भी जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह रुख पिछले 12 वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ उसकी व्यापक कोशिशों के अनुरूप है, जो आतंकवाद के प्रति सख्त रवैये को दर्शाता है।
भारत ने कहा कि देश में आतंकवाद-रोधी व्यवस्था में बदलाव के तहत कानूनी ढांचे को मजबूत किया गया है, संस्थागत सुधार किए गए हैं और खुफिया जानकारी के तालमेल को बेहतर बनाया गया है। इससे केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग काफी बढ़ा है। सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई, आतंकी फंडिंग नेटवर्क को खत्म करने और पुलिस व सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है।
UNGA की छठी समिति में भारत के बयान में एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते के महत्व को फिर से दोहराया गया जो राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र का सम्मान करे।