

China Vietnam Rice Imports Trade: चीन की ओर से वियतनामी चावल की बढ़ती खरीद ने एशियाई चावल बाजार की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।
वियतनाम के चावल निर्यात में इस वर्ष गिरावट के बावजूद चीन तेजी से बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। इससे भारत समेत प्रमुख चावल निर्यातक देशों के लिए एशियाई बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान चीन ने वियतनाम से करीब 10.3 लाख टन चावल खरीदा,
जिसकी कीमत लगभग 50.5 करोड़ डॉलर रही। चीन अब वियतनामी चावल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार बन गया है। फिलीपींस करीब 40.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है।
वियतनाम के कृषि एवं पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान देश का चावल निर्यात करीब 64 लाख टन रहा, जबकि निर्यात मूल्य 311 करोड़ डॉलर रहा। सालाना आधार पर मात्रा में 6.1 प्रतिशत और मूल्य में 10.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। औसत निर्यात कीमत भी करीब 484.8 डॉलर प्रति टन रही।
चीन में टूटे चावल की बढ़ती मांग वियतनाम को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध करा रही है। यदि वियतनाम चीन की मांग को बड़े पैमाने पर पूरा करता है, तो वह भारत के साथ एशिया और अन्य बाजारों में अधिक आक्रामक प्रतिस्पर्धा कर सकता है। खासकर कम कीमत वाले चावल और पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले टूटे चावल के कारोबार में भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि भारत की स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं है। भारत के पास बड़े उत्पादन आधार, विविध किस्मों, मजबूत निर्यात नेटवर्क और बासमती चावल के प्रीमियम बाजार की बढ़त है। मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में भारतीय चावल की मजबूत मौजूदगी भी महत्वपूर्ण है।
दूसरी ओर, वियतनाम के लिए फिलीपींस और चीन पर बढ़ती निर्भरता जोखिम भी है। दोनों बाजार मिलकर उसके कुल निर्यात का 64 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं। भारत के लिए यह अवसर है कि वह अफ्रीका, मध्य पूर्व और अन्य उभरते बाजारों में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करे।
आने वाले महीनों में भारत में खरीफ उत्पादन, मानसून, घरेलू स्टॉक, सरकारी नीतियां और वैश्विक आपूर्ति चावल की कीमतों की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक मांग बढ़ती है और आपूर्ति पर दबाव आता है, तो भारतीय चावल की कीमतों तथा निर्यात को भी सहारा मिल सकता है।