तारिक रहमान और पीएम मोदी, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
PM Modi Bangladesh Visit: पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव की लहर चल रही है। फरवरी 2026 के संसदीय चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार हैं।
इस ऐतिहासिक अवसर पर बीएनपी ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को एक नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए विशेष निमंत्रण भेजने की तैयारी कर रही है।
बीएनपी नेतृत्व का मानना है कि यह समय दोनों देशों के लिए अपनी पुरानी धारणाओं को बदलने का है। तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया है कि नई सरकार भारत के साथ संबंधों में एक ‘नई शुरुआत’ चाहती है।
कबीर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत को अब यह वास्तविकता स्वीकार करनी होगी कि आज के बांग्लादेश में शेख हसीना और अवामी लीग का राजनीतिक अस्तित्व नहीं बचा है। उन्होंने आगे कहा कि यदि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति के तहत बांग्लादेश के साथ सम्मानजनक व्यवहार करता है तो दोनों देश विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।
यह कूटनीतिक हलचल उस समय तेज हुई है जब चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद तारिक रहमान को फोन कर उनकी प्रचंड जीत पर बधाई दी थी। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बातचीत बेहद सकारात्मक रही। इस दौरान पीएम मोदी ने एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के प्रति भारत के अटूट समर्थन को दोहराया।
दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान को उनकी सुविधानुसार भारत आने का निमंत्रण भी दिया है जो भविष्य में दोनों देशों के बीच बढ़ती निकटता का संकेत देता है।
बीएनपी न केवल भारत, बल्कि दक्षिण एशिया के सभी क्षेत्रीय राष्ट्राध्यक्षों को इस शपथ ग्रहण समारोह में बुलाने पर विचार कर रही है। हालांकि, दोस्ती के इस हाथ के साथ बीएनपी ने कुछ सख्त संदेश भी दिए हैं। हुमायूं कबीर ने भारत से अपील की है कि वह शेख हसीना को अपनी जमीन पर पनाह न दे जिन्हें उन्होंने बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास करने वाली ‘आतंकवादी’ करार दिया।’
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पार्टी का तर्क है कि पारदर्शी और मजबूत रिश्तों के लिए भारत को बांग्लादेश की नई लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पीएम मोदी ढाका से आने वाले इस संभावित न्योते को स्वीकार करेंगे, जो दक्षिण एशियाई राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।