14 महीने की पोती के बगल में खामेनेई की कब्र… दुनिया के सामने आई पहली तस्वीर, जुम्मे की नमाज में बदले की दुआ
Ayatollah Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को इमाम अली रजा के पवित्र श्राइन में दफनाया गया, जिसके बाद जुमे की नमाज में बदले की मांग तेज हो गई है।
- Written By: अक्षय साहू
अयातुल्ला अली खामेनेई की कब्र (सोर्स- सोशल मीडिया)
Tomb of Ayatollah Ali Khamenei: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को शियाओं के आठवें इमाम अली रजा के पवित्र श्राइन में दफनाया गया। ईरान के सरकारी मीडिया IRIB के मुताबिक, सुप्रीम लीडर की कब्र के पास उनकी 14 महीने की पोती जहरा को भी दफनाया गया है। इसी पारिवारिक कब्र में उनके दामाद, बेटी और बहू को भी सुपुर्द-ए-खाक किया गया है। खामेनेई की कब्र की पहली तस्वीर भी सार्वजनिक की गई है।
इमाम अली रजा का श्राइन शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। इमाम अली रजा, पैगंबर हजरत मोहम्मद के वंशज थे और उनकी कब्र ईरान में स्थित है। यही वजह है कि इस स्थान का शिया समुदाय में विशेष धार्मिक महत्व है। खामेनेई को यहां दफनाने को सम्मान और आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
जुमे की नमाज में बदले की मांग
ईरान में शुक्रवार की नमाज के दौरान कई धर्मगुरुओं ने खामेनेई की हत्या का बदला लेने की बात कही। रिपोर्टों के मुताबिक, देशभर में नमाज के दौरान लोगों से बदले की मांग को लेकर एकजुट रहने की अपील की गई। बताया गया कि ‘फ्राइडे प्रेयर पॉलिसी काउंसिल’ ने इस अभियान की पहले से योजना बनाई थी।
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धार्मिक नेताओं ने अपने भाषणों में अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम लेते हुए कहा कि खामेनेई की हत्या के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। कई नेताओं ने इसे धार्मिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया।
कई शहरों में एक जैसा संदेश
मशहद, तेहरान, बुशहर, रश्त, कोम, शिराज और मलायर सहित कई शहरों में जुमे की नमाज के दौरान बदले की मांग दोहराई गई। मशहद के इमाम अहमद आलमोलहोदा ने कहा कि बदला केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लोगों को उसका परिणाम भी दिखाई देना चाहिए। वहीं सईद जलीली ने कहा कि खामेनेई की हत्या का जवाब देना देश का अधिकार और सरकार की जिम्मेदारी है।
कुछ धर्मगुरुओं ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के अधिकार का समर्थन किया। उनका कहना था कि इस रणनीतिक क्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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फिर शुरू हो सकती है जंग
जानकारों का मानना है कि ईरान में लगातार उठ रही बदले की मांग से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि, ईरानी सरकार ने अभी तक अमेरिका या इजरायल के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
