स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी में अमेरिका का साथ नहीं देगा ऑस्ट्रेलिया (सोर्स-सोशल मीडिया)
Australia Denies Involvement in Middle East Conflict: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सभी देशों के लिए खुला रखने की अपील की है। उनका यह बयान तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान के बीच हुई युद्धविराम वार्ता के असफल होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी लगाने की घोषणा की। हालांकि अल्बनीज ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस नाकेबंदी में ऑस्ट्रेलिया से किसी भी प्रकार की सहायता का अनुरोध नहीं किया है।
ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिकी नौसेना तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के प्रवेश और निकास को रोकने के लिए नाकेबंदी करेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि इस कार्य में अमेरिका को ऑस्ट्रेलिया, जापान और अन्य प्रमुख देशों का समर्थन मिलेगा। हालांकि, अब ऑस्ट्रेलिया ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वह ईरान के खिलाफ ऐसे किसी अभियान में शामिल नहीं होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह कदम मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को और बढ़ा सकता है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और इस जलडमरूमध्य के माध्यम से गुजरने वाला अधिकांश तेल व्यापार इस पर निर्भर करता है। पाकिस्तान में हुई वार्ता के बाद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका था, जिसके बाद ट्रंप ने यह एकतरफा कदम उठाने की घोषणा की।
एंथनी अल्बनीज ने सोमवार को ‘नाइन नेटवर्क’ टेलीविजन से कहा, “हमें अमेरिका से इस मामले में कोई अनुरोध नहीं मिला है। उन्होंने यह निर्णय खुद लिया है और हमसे इस पर कोई चर्चा नहीं की है।” उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया इस संघर्ष का शीघ्र समाधान चाहता है और चाहता है कि बातचीत फिर से शुरू हो। अल्बनीज ने जोर दिया कि ऑस्ट्रेलिया चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहे और सभी देशों को नौवहन की स्वतंत्रता मिल सके, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय कानून में निर्धारित किया गया है।
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने क्षेत्र में शांति बहाल करने और तनाव कम करने के लिए बातचीत को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करना केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी आवश्यक है। यदि इस जलडमरूमध्य की नाकेबंदी होती है, तो तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिसका प्रभाव दुनिया भर के देशों पर पड़ेगा।
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ईरान ने किसी भी प्रकार की नाकेबंदी के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका इसे ईरान की गतिविधियों को रोकने का उपाय मानता है। ईरान के अनुसार, यह नाकेबंदी उनके देश की संप्रभुता का उल्लंघन करेगी और वैश्विक व्यापार में बाधा डालेगी। ईरान और अमेरिका के बीच यह तनाव क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है, और इसके परिणामस्वरूप बढ़ने वाली अस्थिरता का असर विश्व तेल बाजार और अन्य क्षेत्रों पर पड़ सकता है।