- Hindi News »
- World »
- Aung San Suu Kyi Myanmar Iron Lady Won Election But Not President
चुनाव जीतीं पर फिर भी नहीं बन सकीं राष्ट्रपति, जानिए क्यों टूटा म्यांमार की ‘आयरन लेडी’ आंग सान सू की का सपना?
म्यांमार में लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष करने वाली आंग सान सू की इस समय कई वर्षों की जेल की सजा काट रही हैं। उन्होंने म्यांमार की जनता के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए वर्षों तक लगातार प्रयास किए। इसके चलते उन्हें..
- Written By: अमन उपाध्याय

'आयरन लेडी' आंग सान सू की, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
हम आज बात कर रहे हैं म्यांमार की उस महिला नेता की, जिसे मानवाधिकारों की आवाज़ और संघर्ष की प्रतीक माना जाता है आंग सान सू की। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने दूसरों के अधिकारों के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी शुरू कर दी थी। आज वे जेल में बंद हैं, लेकिन बावजूद इसके, जहां एक ओर उनके विचारों को लेकर कुछ लोग उनकी आलोचना करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी विचारधारा और साहस के लाखों समर्थक आज भी मौजूद हैं।
आंग सान सू की का जन्म 19 जून 1945 को रंगून (अब यांगून) में हुआ था। उनका परिवार शुरू से ही म्यांमार की सेवा और स्वतंत्रता संग्राम में लगा रहा। उनके पिता आंग सान ने आधुनिक बर्मी सेना की स्थापना की थी और द्वितीय विश्व युद्ध के समय उन्होंने अमेरिका का समर्थन किया था। आंग सान बर्मा की आज़ादी के प्रबल पक्षधर थे, इसी कारण उनके विरोधियों ने उनकी हत्या कर दी। उस दौर में म्यांमार को बर्मा के नाम से जाना जाता था।
कभी भी अन्याय के सामने झुकी नहीं
म्यांमार की ‘आयरन लेडी’ कही जाने वाली इस नेत्री ने देशवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर अपनी आवाज उठाई। वह कभी भी अन्याय के सामने झुकी नहीं और अपने संघर्ष को डटकर जारी रखा, जिसके लिए उन्हें 1991 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हालांकि, लोकतंत्र के कुछ नाराज पदाधिकारियों ने उन्हें बार-बार प्रताड़ित किया और उन पर अत्याचार करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।
सम्बंधित ख़बरें
Explainer: US के इतिहास में पहली बार SC की सुनवाई सुनने पहुंचे राष्ट्रपति; जानें इसके पीछे की बड़ी वजह
ट्रंप की 100% टैरिफ की धमकी से भारतीय फार्मा सेक्टर में हड़कंप, सन फार्मा और सिपला के शेयर धड़ाम
‘विनाशकारी हमलों के लिए तैयार रहे इजरायल-अमेरिका’, पूर्व मंत्री पर हमले के बाद ईरानी सेना ने दी बड़ी चेतावनी
Iran के सस्ते ड्रोन के सामने फेल हुआ करोड़ों का अमेरिकी F15 फाइटर जेट, टारगेट पर किया हिट, देखें दिलचस्प VIDEO
आंग सान सू की
आंग सान के पिता का निधन उस वक्त हुआ जब वह सिर्फ दो साल की थीं। इसके बाद उनकी परवरिश उनकी मां ने की, जो खुद भी म्यांमार की राजनीति में एक प्रभावशाली हस्ती थीं। वर्ष 1960 में आंग सान की मां भारत और नेपाल में बर्मा की राजदूत नियुक्त की गईं। उसी समय आंग सान की पढ़ाई दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में हुई, जहां उन्होंने 1964 में राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का रुख किया, जहां उन्होंने दर्शनशास्त्र, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की।
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आंग सान ने न्यूयॉर्क में तीन वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र में कार्य किया। इसी दौरान, 1972 में, उनकी मुलाकात तिब्बती संस्कृति के विशेषज्ञ और भूटान में रहने वाले डॉ. माइकल ऐरिस से हुई, जिनसे उन्होंने विवाह किया। इस दंपत्ति के दो बेटे हुए।
आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया शांति पुरस्कार
2010 में म्यांमार में आम चुनाव हुए, और उसके छह दिन बाद ही आंग सान सू की को कैद से मुक्त कर दिया गया। रिहा होने के बाद, 2012 में वह यूरोप गईं और वहाँ जाकर उन्होंने 1991 में प्राप्त नोबेल शांति पुरस्कार को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया। 2015 में, उन्होंने म्यांमार में 25 वर्षों बाद हुए पहले राष्ट्रीय चुनाव में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) का नेतृत्व किया और पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। हालांकि, देश के संविधान में एक विशेष प्रावधान के चलते वे राष्ट्रपति पद ग्रहण नहीं कर सकीं। इसके बावजूद उनकी पार्टी ने सरकार बनाई और सू की को विदेश मंत्री का पद सौंपा गया।
32 साल मिली सजा
साल 2020 के आम चुनावों में आंग सान सू की की पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, लेकिन म्यांमार की सेना ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए और संसद के पहले ही दिन सू की समेत कई अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया। सेना ने उन पर चुनावी धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और कोविड-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन जैसे कई आरोप लगाए।
दिसंबर 2021 में उन्हें इन आरोपों में चार साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद जनवरी 2022 में एक और सुनवाई में उन्हें फिर से चार साल की अतिरिक्त सजा दी गई। दिसंबर 2022 तक, विभिन्न मामलों में आंग सान सू की को कुल मिलाकर 32 साल की सजा सुनाई जा चुकी थी।
Aung san suu kyi myanmar iron lady won election but not president
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
Topics:
लेटेस्ट न्यूज़
IAS तुकाराम मुंढे को मातृशोक, 100 वर्ष की आयु में मां आसराबाई का निधन, बीड में होगा अंतिम संस्कार
Apr 02, 2026 | 04:04 PMअसम चुनाव: ओवैसी की एंट्री से दिलचस्प हुआ मुकाबला, BJP और कांग्रेस दोनों पर साधा निशाना; UCC पर कही बड़ी बात
Apr 02, 2026 | 04:00 PMExplainer: US के इतिहास में पहली बार SC की सुनवाई सुनने पहुंचे राष्ट्रपति; जानें इसके पीछे की बड़ी वजह
Apr 02, 2026 | 03:56 PM‘खोदा पहाड़…निकला चूहा’, रणबीर कपूर की ‘रामायण’ टीजर पर संजय गुप्ता ने कसा तंज, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
Apr 02, 2026 | 03:54 PMअमर हैं बजरंगबली, फिर ‘जयंती’ कैसी? इस बार जन्मोत्सव मनाने से पहले समझ लें इन दोनों शब्दों का फर्क
Apr 02, 2026 | 03:52 PMपुणे में नाबालिग के अपहरण की जांच में बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब; 76 लोग पुलिस रडार पर, आरोपी गिरफ्तार
Apr 02, 2026 | 03:49 PMSecond Hand car खरीदते वक्त ये उम्र रखें याद, वरना पड़ सकता है भारी, जानें कौन सा समय है सही
Apr 02, 2026 | 03:48 PMवीडियो गैलरी

‘मुसलमानों के खिलाफ…’, मदरसा बोर्ड बंद होने पर शहाबुद्दीन रजवी ने CM पुष्कर सिंह धामी पर साधा निशाना
Apr 01, 2026 | 10:51 PM
बिहार के Nalanda में महिला को बीच सड़क पर नोचते रहे मनचले, कपड़े फाड़कर घसीटा
Apr 01, 2026 | 10:36 PM
हत्या के 9 महीने बाद लौटे राजा रघुवंशी, घर में गूंजी बच्चे की किलकारी
Apr 01, 2026 | 10:23 PM
क्या इजरायली जेलों में कैदियों को दिए जा रहे बिजली के झटके? वायरल वीडियो और नए कानून ने दुनिया को चौंकाया
Apr 01, 2026 | 10:03 PM
लखनऊ में ‘वर्दी वाली गुंडागर्दी’? परिवार के सामने युवक को घसीटकर ले गई पुलिस, रोता रहा बच्चा, नहीं बताया कारण
Apr 01, 2026 | 09:58 PM
हाई-स्पीड सफर में सेहत से खिलवाड़! वंदे भारत के खाने पर भड़कीं महिला यात्री, IRCTC ने जांच के बाद दी सफाई
Apr 01, 2026 | 09:53 PM













