अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों पर हमला, 3 की मौत 1 घायल
अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों पर मंगलवार की शाम अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला दिया। मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में 3 कर्मचारियों की मौत हो गई है।
- Written By: साक्षी सिंह
अफगानिस्तान स्थित भारतीय दूतावास
काबुल: अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों पर मंगलवार की शाम अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला दिया। मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में 3 कर्मचारियों की मौत हो गई है। जबकि एक सख्श घायल है। यह हमला कर्मचारियों को लेकर जा रही गाड़ी पर किया गया।
अफगानिस्तान के जलालाबाद में इंडियन कॉन्स्युलेट के लिए काम करने वाले अफगान कर्मचारियों किया हमला टारगेट किलिंग माना जा रहा है। यह हमला कर्मचारियों को लेकर जा रही गाड़ी पर किया गया। लेकिन अभी तक किसी भी ग्रुप ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।
विदेश की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सम्बंधित ख़बरें
सालों तक भारत समेत दुनियाभर को लूटा…अब इन देशों से किस बात का हर्जाना मांग रहा ब्रिटेन? जानें पूरा विवाद
ट्रंप का बड़ा फैसला: ईरान के साथ समझौता किया खत्म, पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें पूरी तरह नाकाम
Nijjar Murder: निज्जर हत्याकांड में भारत को क्लीन चिट, अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का खुलासा
PM Modi Indonesia: पीएम मोदी का तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरा संपन्न, अब ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना
भारत ने सुरक्षा वजहों से 4 साल पहले यहां के दूतावास बंद किया। जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास को सुरक्षा की वजहों से आधिकारिक तौर पर 2020 में बंद कर दिया गया था। हालांकि इसका अफगान नागरिकों की एक छोटी सी टीम दूतावास से जुड़े कामकाज संभालती है। भारत ने अफगानिस्तान में पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के शासन के दौरान कई प्रोजेक्ट्स में लाखों डॉलर का निवेश किया था। हालांकि 2021 में तालिबान के आने के बाद भारत ने सभी वाणिज्य दूतावास बंद कर दिए। अभी सिर्फ काबूल में दूतावास चालू है। जहां भारतीय कर्मचारी रहते हैं।
भारत ने नहीं दी है तालिबान को मान्यता
हालांकि भारत ने अभी तक तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है। भारत समय-समय पर अफगान लोगों को गेहूं, दवाएं और चिकित्सा समेत मानवीय सहायता मुहैया कराता रहा है। तालिबान लगातार दुनिया से उसे मान्यता देने की मांग कर रहा है। तालिबान का आरोप है कि उन्होंने मान्यता हासिल करने के लिए सभी जरूरतों को पूरा कर लिया है। इसके बावजूद अमेरिका के दबाव में आकर दूसरे देश हमें मान्यता नहीं दे रहे हैं।
