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अफगानिस्तान में पूरे हुए तालिबान शासन के 3 साल, जानें कैसी है अब यहां की व्यवस्था

अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तीन साल पूरे हो गए हैं। अमेरिका के सैनिकों की वापसी के बाद यहां तालिबान ने सत्ता संभाल ली थी। इन तीन साल में अफगानिस्तान की व्यवस्था में काफी कुछ बदलाव हुए हैं।

  • Written By: रीना पंवार
Updated On: Aug 14, 2024 | 02:23 PM

(सौजन्य सोशल मीडिया)

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काबुल : अफगानिस्तान में तालिबान शासन को तीन साल हो गए हैं। अफगानिस्तान से अमेरिका के सैनिकों की वापसी के बाद यहां तालिबान ने सत्ता संभाल ली थी। इन तीन साल में उसने अफगानिस्तान में इस्लामिक कानून की अपनी व्याख्या थोपी और वैध सरकार के अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश की है। देश के आधिकारिक शासक के तौर पर कोई राष्ट्रीय मान्यता न होने के बावजूद तालिबान ने चीन और रूस जैसी प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं।

तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित वार्ताओं में भी भाग लिया है, जिसमें अफगानिस्तान की महिलाओं तथा नागरिक समाज से जुड़े लोगों को भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया। यह तालिबान के लिए जीत है जो अपने आप को देश के इकलौते सच्चे प्रतिनिधि के तौर पर देखता है।

कैसी है अब अफगानिस्तान में व्यवस्था

अफगानिस्तान में मस्जिद और मौलवी एक तरफ हैं तथा काबुल प्रशासन दूसरी तरफ है। प्रशासन मौलवियों के फैसलों को लागू करता है और विदेशी अधिकारियों से मुलाकात करता है। एक ‘मिडल ईस्ट इंस्टीट्यूट’ में अनिवासी शोधार्थी जावेद अहमद के मुताबिक, ‘‘विभिन्न स्तर पर उग्रवाद है और तालिबान सत्तारूढ़ कट्टरपंथियों और राजनीतिक व्यावहारवादियों के साथ एक असहज गठबंधन में हैं।”

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विदेशी सहायता पर बढ़ी निर्भरता

सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा के प्रभारी रहते हुए और सर्वोच्च नेताओं के सेवानिवृत्त होने या इस्तीफा देने तक सबसे विवादास्पद नीतियों के पलटने की संभावना नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं और घर लौटने के दबाव में पाकिस्तान से आ रहे अफगान नागरिकों के प्रवाह ने आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी सहायता पर अफगानिस्तान की निर्भरता को बढ़ा दिया है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भविष्य में उस प्रकार की सहायता नहीं भेज सका तो यह एक बड़ा जोखिम है।

महिला शिक्षा और रोजगार को किया बैन

अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक और महत्वपूर्ण झटका महिला शिक्षा और अधिकतर रोजगार पर तालिबान का प्रतिबंध है, जिससे अफगानिस्तान की आधी आबादी खर्च और कर भुगतान के मामले में कमजोर पड़ गयी है अन्यथा अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती थी। तालिबान के लिए चीन और रूस से संबंध महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य है। फिलहाल खाड़ी देश भी तालिबान के साथ अपने रिश्ते बढ़ा रहे हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

3 years of taliban rule completed in afghanistan

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Published On: Aug 14, 2024 | 02:23 PM

Topics:  

  • Afghanistan
  • Kabul

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