क्या है वो ₹25,000 करोड़ का घोटाला, जिससे जुड़ा है सुवेंदु अधिकारी का नाम? ED अभी भी कर रही जांच
Suvendu Adhikari: शारदा ग्रुप के गिरफ्तार चेयरमैन सुदीप्त सेन ने एक याचिका में आरोप लगाया गया कि सुवेंदु अधिकारी ने उनसे पैसे लिए और स्कीम को प्रमोट करने के लिए अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया।
- Written By: मनोज आर्या
सुवेंदु अधिकारी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Suvendu Adhikari Name In Saradha Chit Fund Scams: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज शुक्रवार, (8 मई, 2026) किसी ऐतिहासिक दिन से कम नहीं है। क्योंकि अब तक के ऐतिहास में पहली बार राज्य में भारतीय जनता पार्टी ने अपने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया है। 2026 विधानसभा चुनाव मे मिली प्रचंड बहुमत के बाद बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना है। अब वह पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री (West Bengal New CM) होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम का ऐलान किया। शनिवार, 9 मई को वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
पार्षद से विधायक और फिर सांसद से मुख्यमंत्री तक का सफर तय करने वाले सुवेंदु अधिकारी के नाम की चर्चा बंगाल के साथ-साथ पूरे देश में हो रही है। कभी टीएमसी और ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे सुवेंदु ने भवानीपुर में दीदी को करारी शिकस्त दिया था, जिसके बाद भाजपा अब ईनाम के तौर पर राज्य की कमान उनके हाथों में सौंप रही है।
क्या है सारदा ग्रुप चिट फंड केस?
टीएमसी से भारतीय जनता पार्टी में आए सुवेंदु अधिकारी का नाम कई विवादों से जुड़ा हुआ है। सुवेंदु अधिकारी सारदा ग्रुप की पोंजी स्कीम के सिलसिले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की जांच के दायरे में आए। अप्रैल 2013 में यह स्कीम बंद हो गई, जिसके कारण लाखों निवेशकों को लगभग ₹25,000 करोड़ का चूना लगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर घोटाले की जांच का जिम्मा संभाल रही CBI ने 24 सितंबर 2014 को सुवेंदु अधिकारी से उनकी पार्टी द्वारा मंजूर मीडिया और इवेंट्स के जरिए ग्रुप को संभावित फायदे पहुंचाने में उनकी कथित मिलीभगत के बारे में पूछताछ की।
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(शारदा चिट फंड केस क्या है?)
हालांकि, सुवेंदु अधिकारी का नाम जांचकर्ताओं द्वारा पहचाने गए कई TMC नेताओं में सामने आया था, लेकिन प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी या धोखाधड़ी के लिए किसी खास चार्जशीट में उनका सीधे तौर पर नाम नहीं था।
शारदा ग्रुप के चेयरमैन का सुवेंदु पर आरोप
दिसंबर 2020 में, शारदा ग्रुप के गिरफ्तार चेयरमैन सुदीप्त सेन ने एक याचिका फाइल की जिसमें आरोप लगाया गया कि सुवेंदु अधिकारी ने उनसे पैसे लिए और स्कीम को प्रमोट करने के लिए अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। जून 2022 में, TMC ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की। लेकिन, सुवेंदु अधिकारी ने इन दावों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया और उन्हें TMC लीडरशिप के साथ अपनी अनबन के बैकग्राउंड में राजनीति से प्रेरित बताया। इसके बाद CBI से सेन के शपथ पत्र की जांच करने की मांग की, जिसमें पिछली पूछताछ के दौरान उनके सहयोग का हवाला दिया गया।
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जांच में कई TMC नेताओं का नाम
सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि आरोप बेबुनियाद थे और 2020 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें बदनाम करने के लिए लगाए गए थे। शारदा जांच में कई TMC नेता शामिल थे, जिसमें MP कुणाल घोष और श्रींजॉय बोस की गिरफ्तारी भी शामिल है। अक्टूबर 2025 तक, सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कोई भी आरोप साबित (दोषी) नहीं हुआ है। पीड़ितों को न्याय मिलने में हो रही काफी देरी के बीच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सारदा से जुड़ी संपत्तियों और लिंक्स की जांच कर रही है।
