बंगाल के मिड-डे मील में बच्चों को नहीं मिलेंगे अंडे? ISKCON को कमान मिलते ही भड़की TMC, मचा सियासी बवाल
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन को देने और अंडे हटाने पर विवाद शुरू हो गया है। सुवेंदु सरकार के फैसले पर TMC ने कहा कि यह प्रोटीन का एक अहम स्रोत है।
- Written By: अमन मौर्या
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और ऋतब्रत बनर्जी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Bengal Mid Day Meal Controversy: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य से सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील अब इस्कॉन उपलब्ध कराएगा। इस योजना के तहत अब इस्कॉन, प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक, शुद्ध भोजन उपलब्ध कराएगा। इसके पहले से सरकारी स्कूलों में अंडे परोसे जाते थे। सरकार के इस फैसले के बाद विवाद शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए बताया कि इससे बच्चों को न्यूट्रीशन्स से वंचित किया जा रहा है।
दोनो गुट आए साथ
दिलचस्प बात यह है कि सुवेंदु सरकार के इस फैसले को TMC ममता गुट और बागी गुट एक सुर में आलोचना कर रहा है। बागी गुट के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी और ममता गुट से नेता डेरेक ओ ब्रायन और कुणाल घोष ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।
शाकाहारी खाना बंगाली परंपरा के अनुकूल नहीं: ऋतब्रत
मिड-डे मील के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले का विरोध करते हुए विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि जब प्रोटीन की बात आती है, तो खाने से अंडा हटाना सही नहीं है, क्योंकि यह प्रोटीन का एक अहम स्रोत है। बंगाल में लोग पारंपरिक रूप से मांसाहारी खाना खाते हैं। अगर इन्हें हटा दिया जाता है, तो सिर्फ शाकाहारी खाना ही परोसा जाएगा, जो बंगाल की खान-पान की परंपराओं के अनुकूल नहीं है। हम इस कदम का कड़ा विरोध करते हैं।
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#WATCH | Kolkata: On mid-day meal issue, West Bengal LoP Ritabrata Banerjee says, “… When it comes to protein, removing egg from the meal is not right, as it is an important source of protein. In Bengal, people traditionally eat non‑vegetarian food. If these are excluded, only… pic.twitter.com/hBF85aUmXC — ANI (@ANI) June 24, 2026
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फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत: कुणाल घोष
TMC के ममता गुट से विधायक कुणाल घोष ने कहा मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अगर ISKCON मिड-डे मील तैयार करता है, तो वह एक धार्मिक संस्था है, इसलिए बच्चों का मेन्यू नॉन-वेज से वेज हो जाएगा और अंडे हटा दिए जाएंगे। इसलिए हमारी गुजारिश है कि इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। उन्हें खाना शाकाहारी ही रखना होगा। इसे किसी धार्मिक संस्था से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
