ममता बनर्जी, फोटो- सोशल मीडिया
West Bengal Election TMC List: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपने अप्रत्याशित फैसलों से विरोधियों को हैरान कर दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को सभी 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, जिसने राज्य के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है।
इस लिस्ट में केवल नाम नहीं हैं, बल्कि सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए एक सोची-समझी रणनीति है। ममता बनर्जी इस बार ‘संगठन बनाम चेहरा’ की लड़ाई में संगठन और साफ-सुथरी छवि को प्राथमिकता देती दिखाई दे रही हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही सियासी तापमान बढ़ गया है। ममता बनर्जी ने इस बार भारतीय जनता पार्टी के ‘नो-रिपीट’ फॉर्मूले को अपनाकर बड़ा दांव चला है। बीजेपी पहले गुजरात सहित कई चुनावों में पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवार उतारकर सफलता पा चुकी है। अब ममता इसी रणनीति से सत्ता विरोधी लहर को साधकर चौथी जीत की राह तैयार कर रही हैं
इस बार की लिस्ट में सबसे बड़ी खबर 74 मौजूदा विधायकों का पत्ता कटना है। पार्टी ने उन नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है जिनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी थी या जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इनमें जेल में बंद पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी, क्रिकेटर मनोज तिवारी और अनुभवी नेता परेश पाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
हालांकि, पार्टी ने पूरी तरह जोखिम नहीं लिया है और 135 भरोसेमंद विधायकों को उनकी पुरानी सीटों पर ही दोबारा मौका दिया है। वहीं, 15 ऐसे विधायक भी हैं जिनका इलाका यानी विधानसभा क्षेत्र बदल दिया गया है, ताकि स्थानीय नाराजगी के बावजूद उनके अनुभव का लाभ उठाया जा सके। यह रणनीति ठीक वैसी ही नजर आती है जैसी भाजपा अपने ‘नो-रिपीट’ फॉर्मूले के जरिए अक्सर राज्यों में आजमाती रही है।
इस पूरी चुनावी बिसात में नंदीग्राम का मुकाबला सबसे अधिक रोमांचक होने वाला है। ममता बनर्जी ने भाजपा के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी को उन्हीं के गढ़ में घेरने के लिए हाल ही में भाजपा छोड़कर आए पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही, टीएमसी ने सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए महिलाओं, अल्पसंख्यक उम्मीदवारों और अनुसूचित जाति-जनजाति के 95 चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है। पार्टी ने 3 सीटें अपने सहयोगी दल बीजीपीएम के लिए छोड़ी हैं।
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बंगाल की राजनीति में फिल्मी सितारों का हमेशा से बोलबाला रहा है, लेकिन इस बार टीएमसी ने ग्लैमर की चमक से दूरी बनाई है। एक तरफ जहां पुराने फिल्मी सितारों को टिकट नहीं मिले, वहीं कंचन मल्लिक और चिरंजीत चक्रवर्ती जैसे मशहूर अभिनेताओं के टिकट भी काट दिए गए हैं। इनकी जगह पार्टी ने कुणाल घोष और देबांग्शु भट्टाचार्य पर दांव लगाया है। दिलचस्प बात यह है कि कई विधायकों के टिकट काटकर उनके बच्चों को मौका दिया गया है, जिसे पार्टी के भीतर एक ‘जेनरेशनल शिफ्ट’ या भविष्य की लीडरशिप तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है।