असम चुनाव से पहले कांग्रेस को लगा सबसे बड़ा झटका, सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा, क्या पलटेगा सियासी खेल?

Pradyut Bordoloi Resignation: असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नगांव सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
Pradyut Bordoloi Resignation
प्रद्युत बोरदोलोई, फोटो- सोशल मीडिया
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Assam Assembly Elections 2026: असम की राजनीति में इस समय एक ऐसी हलचल मची है जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। राज्य में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच कांग्रेस पार्टी को एक ऐसा घाव लगा है, जिसकी भरपाई करना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।

नगांव से लोकसभा सांसद और पार्टी के बेहद भरोसेमंद चेहरा माने जाने वाले प्रद्युत बोरदोलोई ने अचानक अपने पद और सदस्यता से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। एक आम नागरिक के लिए यह खबर केवल एक नेता का पाला बदलना नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे और प्रतिनिधित्व की कहानी है जो सालों से नगांव की जनता ने उन पर जताया था।

आखिर क्यों टूटा प्रद्युत का कांग्रेस से नाता?

प्रद्युत बोरदोलोई का कांग्रेस के साथ रिश्ता केवल कुछ सालों का नहीं, बल्कि दशकों का रहा है। उन्होंने महज 16 साल की उम्र में छात्र राजनीति के जरिए इस पार्टी का दामन थामा था। साल 1998 में मार्घेरिटा सीट से विधायक बनकर अपने संसदीय सफर की शुरुआत करने वाले बोरदोलोई ने तरुण गोगोई की सरकार में 15 सालों तक मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। साल 2019 में जब उन्होंने नगांव लोकसभा सीट से जीत दर्ज की, तो उन्हें ऊपरी असम में कांग्रेस का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाने लगा। लेकिन आज उसी "डीएनए" वाली पार्टी को छोड़ते हुए उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र में अपना गहरा दुख व्यक्त किया है।

इस्तीफे के पीछे का असली कारण

यह इस्तीफा रातों-रात लिया गया फैसला नहीं लगता, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से सुलग रही नाराजगी है। बोरदोलोई ने पार्टी नेतृत्व के सामने गंभीर आरोप लगाए हैं कि पार्टी के भीतर "अपराधियों" को शह दी जा रही है। उनका सीधा निशाना विधायक आसिफ नजर पर था। प्रद्युत का दावा है कि बीते पंचायत चुनाव के दौरान आसिफ नजर के करीबियों ने उन पर हमला करवाया था। दुखद बात यह रही कि जब हमलावर जमानत पर बाहर आया, तो विधायक ने उसका स्वागत किया और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई से उसकी मुलाकात करवाई। प्रद्युत के लिए यह उनके आत्मसम्मान पर चोट थी। उन्होंने साफ तौर पर पूछा कि एक अपराधी की छवि वाले व्यक्ति को दोबारा टिकट कैसे दिया जा सकता है?

क्या नगांव का 'गढ़' अब होगा बीजेपी के नाम?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रद्युत बोरदोलोई का अगला कदम क्या होगा? हालांकि उन्होंने अभी तक अपने भविष्य की योजनाओं का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो चुका है। सूत्रों की मानें तो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। यदि बोरदोलोई भाजपा का दामन थामते हैं, तो नगांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ इतनी गहरी है कि उनका जाना कांग्रेस के कैडर को पूरी तरह बिखेर सकता है।

असम का आम चुनाव अब एक नई करवट ले चुका है। जब प्रद्युत जैसे कद का नेता पार्टी छोड़ता है, तो वह केवल एक व्यक्ति नहीं जाता, बल्कि उसके साथ सालों का अनुभव और समर्थकों का एक बड़ा हुजूम भी जाता है। फिलहाल कांग्रेस ने इस पर चुप्पी साध रखी है और भाजपा भी सावधानी से कदम बढ़ा रही है। जैसे-जैसे वोटिंग करीब आ रही है, वैसे-वैसे असम की सत्ता का संघर्ष और भी रोमांचक होता जा रहा है।

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