बंगाल में चुनाव आयोग का एक्शन, डीजीपी से लेकर मुख्य सचिव तक बदले, क्यों हिली ममता सरकार की प्रशासनिक मशीनरी?
West Bengal News: पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा के साथ ECI ने राज्य का अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया। आयोग ने डीजीपी और कोलकाता कमिश्नर समेत कई अधिकारियों को हटाकर नई नियुक्तियां की हैं।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
सीईसी ज्ञानेश कुमार, फोटो- सोशल मीडिया
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की चुनावी जंग शुरू होने से पहले ही दिल्ली से एक ऐसा आदेश आया है जिसने राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में हड़कंप मचा दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से रविवार को चुनाव शांतिपूर्ण कराने के आश्वासन के बाद ये कार्रवाई की कई।
आयोग ने सोमवार को राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अमले की पूरी तस्वीर बदल दी है। यह कार्रवाई न केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है, बल्कि उन अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने के लिए भी है जिन पर पक्षपात के आरोप लगाए जा सकते थे।
सिद्ध नाथ गुप्ता बने नए डीजीपी
चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस विभाग के शीर्ष स्तर पर तत्काल प्रभाव से बदलाव किए हैं। 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता को पश्चिम बंगाल का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है, उन्होंने पीयूष पांडे की जगह ली है।
इसके अलावा, कोलकाता पुलिस की कमान अब अजय कुमार नंद के हाथों में होगी, जिन्हें सुप्रतिम सरकार की जगह नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है। आयोग ने कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए नटराजन रमेश बाबू को डीजी और अजय मुकुंद रानाडे को एडिशनल डीजी (लॉ एंड आर्डर) के पद पर तैनात किया है।
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मुख्य सचिव और गृह सचिव पर गाज, चुनावी कार्यों से बाहर
पुलिस के साथ-साथ राज्य की नौकरशाही में भी एक अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला है। रविवार रात को ही आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा के तबादले का आदेश जारी कर दिया। आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी निर्देश दिया है कि ये दोनों अधिकारी अब चुनाव से संबंधित किसी भी प्रकार के कार्य में शामिल नहीं होंगे। इनकी जगह अब दुष्यंत नरियाला नए मुख्य सचिव और संघमित्रा घोष नई गृह सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
120 अधिकारियों की नियुक्तियां कानूनी पेचीदगियों में फंसी
एक तरफ जहां चुनाव आयोग ने खुद बड़े बदलाव किए, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार द्वारा अंतिम समय में किए गए तबादलों पर रोक लगा दी गई है। दरअसल, रविवार को चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक एक घंटे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 11 IAS और 109 WBCS अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया था।
अब आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों ने एमसीसी लागू होने से पहले अपने नए पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया था, वे अब बिना आयोग की अनुमति के पदभार नहीं संभाल सकेंगे। अब प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए भी किसी भी तबादले के लिए राज्य सरकार को पहले चुनाव आयोग की सहमति लेनी होगी।
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23 और 29 अप्रैल को मतदान, 8 चरणों के बजाय 2 चरणों में होगा फैसला
इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को काफी संक्षिप्त रखा गया है। 2021 के 8 चरणों के मुकाबले इस बार राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए केवल दो चरणों में मतदान होगा।
पहला चरण (23 अप्रैल): 152 सीटों पर मतदान।
दूसरा चरण (29 अप्रैल): शेष 142 सीटों पर मतदान।
नतीजे (4 मई): दोनों चरणों की मतगणना एक साथ होगी।
