उन्होंने पूरे सिस्टम और लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया! सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC रेड मामले में ममता को लगाई फटकार
I-PAC ED Raid Case: ईडी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई फटकार। अदालत ने आई-पैक रेड में ममता बनर्जी के हस्तक्षेप को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा।
- Written By: सजल रघुवंशी
ममता बनर्जी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court On Mamata Banerjee I-PAC ED Raid Case: आई-पैक (I-PAC) के ऑफिस और को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी में दखल देने के आरोपों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। दरअसल, बुधवार को ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम बात कही।
बता दें कि इस मामले में बंगाल की तरफ से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट से अपील की है कि ईडी का केस संविधान के आर्टिकल 131 के तहत दर्ज होना चाहिए न कि आर्टिकल 32 के तहत। उनका तर्क है कि ईडी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकती है, यह अनुच्छेद मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है और ईडी कोई व्यक्ति नहीं है इसलिए उसके मौलिक अधिकार नहीं हो सकते।
सुप्रीम कोर्ट ने कही बड़ी बात
एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने इस मामले को केंद्र और राज्य के बीच विवाद बताया। हालांकि, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने उनकी दलील से असहमति जताते हुए सवाल उठाया कि इसका राज्य सरकार के अधिकारों से क्या संबंध है। उन्होंने आगे कहा कि आप ऐसे जांच के बीच में नहीं जा सकते हो। किसी राज्य का मुख्यमंत्री इस तरह छापेमारी में दखल देता है और आप कहते हैं कि यह मूलरूप से राज्य और केंद्र सरकार के बीच विवाद का मामला है।
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‘उन्होंने पूरे सिस्टम और लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया’
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने साफ कहा कि यह सेंटर और स्टेट के बीच विवाद का मामला नहीं है। यह तो उस व्यक्ति की ओर से किया गया कृत्य है जो राज्य की सीएम हैं और उन्होंने ऐसा करके पूरे सिस्टम और लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया। सुनवाई के दौरान ईडी का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी बताया कि सीएम ममता बनर्जी अपने साथ दस्तावेज भी ले गईं थी।
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मेनका गुरुस्वामी की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान?
एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि अनुच्छेद 32 का प्रावधान व्यक्तियों के लिए है, सरकार के लिए नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि इस याचिका में कानून से जुड़े अहम प्रश्न उठाए गए हैं, इसलिए इसे अनुच्छेद 145 के तहत पांच जजों की संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए। इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने असहमति जताते हुए कहा कि लगभग हर याचिका में कानून से जुड़े सवाल होते हैं यदि इस तर्क को स्वीकार कर लिया जाए, तो हर मामले को बड़ी बेंच के पास भेजना पड़ेगा। वहीं, मेनका गुरुस्वामी ने यह भी बताया कि इसी तरह की एक याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कलकत्ता हाईकोर्ट में भी लंबित है।
