Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

ममता बनर्जी बनेंगी वकील? बंगाल वोटर लिस्ट विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में खुद देंगी दलीलें

TMC vs Election Commission: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के एसआईआर के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मामले में ममता खुद वकील के रूप में दलीलें पेश कर सकती हैं।

  • Written By: प्रतीक पांडेय
Updated On: Feb 04, 2026 | 07:16 AM

फोटो सोर्स- टीएमसी 'एक्स'

Follow Us
Close
Follow Us:

Mamata Banerjee at Supreme Court: बंगाल चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर है। आज मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी सांसदों की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इस सुनवाई की सबसे बड़ी चर्चा ममता बनर्जी का खुद अपनी दलीलें पेश करने की संभावना को लेकर है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को एक नए अवतार में नजर आ सकती हैं। बंगाल में वोटर लिस्ट के एसआईआर के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी खुद एक वकील के रूप में सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित रह सकती हैं। चूंकि मुख्यमंत्री ने खुद कानून की पढ़ाई की है, इसलिए टीएमसी सूत्रों का मानना है कि वे अपनी दलीलें खुद पेश कर इस मुद्दे की गंभीरता को अदालत के सामने रखना चाहती हैं।

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की एक उच्चस्तरीय पीठ करेगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत कर रहे हैं। इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं। ममता बनर्जी के अलावा, टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और मोस्तारी बानो ने भी इस प्रक्रिया के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं, जिन पर अदालत आज विस्तार से विचार करेगी।

सम्बंधित ख़बरें

‘आपकी हिम्मत कैसे हुई…’, केदार जाधव की शिकायत पर SC ने रोहित पवार को लगाई फटकार, क्या है MCA सदस्यता विवाद ?

ममता ने राहुल गांधी को दिया झटका, बंगाल में ‘एकला चलो’ की राह पर TMC; बिना गठबंधन चुनाव लड़ने का किया ऐलान

राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य मानहानि नहीं, सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तारी जरूरी नहीं, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

‘भारतीयों को शिकार नहीं बनाने देंगे…’, व्हाट्सएप डेटा प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट की मेटा को कड़ी फटकार

क्या है SIR विवाद और 1.25 करोड़ नामों का पेच?

इस पूरे कानूनी विवाद के केंद्र में वोटर लिस्ट का ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ यानी SIR है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में लगभग 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची में डाल दिए गए हैं। यह विसंगतियां मुख्य रूप से 2002 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान आंकड़ों के मिलान के दौरान सामने आई हैं।

इन विसंगतियों के कुछ तकनीकी उदाहरण इस प्रकार हैं:

• मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र के बीच का अंतर 15 वर्ष से कम पाया जाना।
• माता-पिता और बच्चे की उम्र में 50 साल से ज्यादा का अंतर होना।
• माता-पिता के नाम की स्पेलिंग या अन्य पहचान संबंधी विसंगतियां।
ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का आरोप है कि इन विसंगतियों के आधार पर बड़ी संख्या में असली वोटर्स के नाम काटे जा सकते हैं जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

ममता बनर्जी और टीएमसी के गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने 28 जनवरी को अपनी याचिका दायर की थी, जिसमें निर्वाचन आयोग और बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है। इससे पहले उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इस पूरी प्रक्रिया को ‘मनमाना’ और ‘खामियों से भरा’ बताया था। ममता बनर्जी का तर्क है कि यदि मौजूदा स्वरूप में SIR की प्रक्रिया जारी रही, तो बड़ी संख्या में लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे, जो सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार होगा।

People’s Advocate Vs Devil’s Advocate. pic.twitter.com/D9PUyjkeDY — All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 3, 2026

वहीं, टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग लिखित आदेश देने के बजाय अनौपचारिक माध्यमों से निर्देश जारी कर रहा है, जो प्रक्रियागत खामियों को दर्शाता है। टीएमसी की मांग है कि जब तक सभी दावों और आपत्तियों का पूरी तरह निपटारा न हो जाए, तब तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए।

पिछली सुनवाई और कोर्ट का रुख

इससे पहले 19 जनवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को लेकर कुछ कड़े निर्देश जारी किए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि SIR की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए ताकि आम लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि जिन मतदाताओं के नाम ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची में हैं, उनकी सूची ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित की जाए ताकि लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकें।

यह भी पढ़ें: ‘तुम क्या हो? …ये ही होना चाहिए’, जनसुनवाई में लापरवाह अफसर पर भड़के राजस्थान सीएम भजनलाल शर्मा

आज की सुनवाई इस मायने में अहम है कि अदालत ममता बनर्जी की दलीलों और चुनाव आयोग के जवाब के बाद क्या रुख अपनाती है। यदि ममता बनर्जी खुद जिरह करती हैं, तो यह भारतीय न्यायिक इतिहास और राजनीति के लिहाज से एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण घटना होगी। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

Mamata banerjee supreme court hearing west bengal electoral roll sir issue

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Feb 04, 2026 | 07:16 AM

Topics:  

  • Mamata Banerjee
  • SIR
  • Supreme Court
  • West Bangal News
  • West Bengal

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.