ममता ने राहुल गांधी को दिया झटका, बंगाल में ‘एकला चलो’ की राह पर TMC; बिना गठबंधन चुनाव लड़ने का किया ऐलान
Mamata Banerjee: ममता बनर्जी का यह फैसला विपक्षी एकता के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे थे कि 'INDIA' गठबंधन के घटक दल बंगाल में मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं।
- Written By: मनोज आर्या
ममता बनर्जी, (मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल)
Mamata Banerjee On West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक ऐसी घोषणा की है, जिसने न केवल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बल्कि कांग्रेस और वामदलों के समीकरणों को भी हिला कर रख दिया है। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी बंगाल की सभी सीटों पर बिना किसी गठबंधन (No Alliance) के अकेले चुनाव लड़ेगी।
ममता बनर्जी का यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर बन रहे विपक्षी एकता के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी को रोकने के लिए ‘INDIA’ गठबंधन के घटक दल बंगाल में मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए ‘एकला चलो’ की रणनीति पर मुहर लगा दी है।
ममता बनर्जी ने क्यों लिया यह फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के इस फैसले के पीछे तीन मुख्य कारण हो सकते हैं।
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1. क्षेत्रीय अस्मिता: ममता बनर्जी खुद को बंगाल की बेटी और राज्य के हितों की एकमात्र रक्षक के रूप में पेश करना चाहती हैं। उन्हें लगता है कि किसी भी राष्ट्रीय दल (कांग्रेस या लेफ्ट) के साथ जुड़ने से उनकी क्षेत्रीय मजबूती कम हो सकती है।
2. सीटों का गणित: गठबंधन होने की स्थिति में टीएमसी को कांग्रेस और लेफ्ट के लिए महत्वपूर्ण सीटें छोड़नी पड़तीं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष का खतरा था।
3. त्रिकोणीय मुकाबला: ममता बनर्जी को लगता है कि यदि मुकाबला त्रिकोणीय (TMC vs BJP vs Congress-Left) होता है, तो मुस्लिम और ग्रामीण वोटों का ध्रुवीकरण उनके पक्ष में अधिक मजबूती से होगा।
बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
ममता बनर्जी के इस ऐलान पर बीजेपी ने तंज कसते हुए कहा है कि दीदी हार के डर से घबरा गई हैं और उन्हें अपने सहयोगियों पर भी भरोसा नहीं रहा। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने इस फैसले को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा है कि इससे अंततः बीजेपी को ही फायदा होगा।
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पश्चिम बंगाल में कब होगा विधानसभा चुनाव?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इसी साल यानि की 2026 में ही होना है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं, जहां बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होती है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, जिसके लिए उन्होंने 215+ सीटें जीतने की योजना पर काम कर रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर रही है और भ्रष्टाचार तथा घुसपैठ जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरकर सत्ता परिवर्तन (सोनार बांग्ला) का दावा कर रही है।
