पश्चिम बंगाल में हुई झड़प, फोटो- सोशल मीडिया
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा का साया एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। शनिवार दोपहर जब शहर प्रधानमंत्री के संबोधन की प्रतीक्षा कर रहा था, तभी गिरिश पार्क इलाके में अचानक चीख-पुकार और पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते हालात इतने बेकाबू हो गए कि पुलिस को स्थिति संभालने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।
शनिवार दोपहर की शांति उस वक्त भंग हो गई जब ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले भाजपा और टीएमसी के समर्थक आमने-सामने आ गए। गिरिश पार्क इलाके में हुई इस हिंसक झड़प में न केवल आम कार्यकर्ता बल्कि ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर भी घायल हो गए। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. शशि पांजा को भी इस टकराव में चोटें आई हैं।
इस हिंसा के बाद रविवार को भी भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग जारी रही। भाजपा ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सोची-समझी साजिश के तहत उन बसों को निशाना बनाया, जिनमें समर्थक प्रधानमंत्री की रैली में शामिल होने जा रहे थे। भाजपा नेताओं का दावा है कि हिंसा की शुरुआत सत्ताधारी दल की तरफ से की गई थी।
दूसरी तरफ, कोलकाता पुलिस ने रात भर छापेमारी कर अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से तीन- कृषाणु बोस, सनी डे और चरणजीत सिंह भाजपा समर्थक बताए जा रहे हैं। भाजपा का कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा है और केवल उनके कार्यकर्ताओं को ही निशाना बनाया जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद सियासत और गरमा गई है। भाजपा पार्षद सजल घोष ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए एक बड़ी चुनौती पेश की है। उनका कहना है कि जिन भाजपा समर्थकों को पकड़ा गया है, वे घटना के समय वहां मौजूद ही नहीं थे। घोष ने पुलिस से मांग की है कि उस समय की सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों की मोबाइल टावर लोकेशन सार्वजनिक की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के दबाव में पुलिस ने हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं लगाई हैं।
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वहीं, टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि एक महिला मंत्री पर हमला राज्य की हर महिला का अपमान है और यह भाजपा की उस बाहरी संस्कृति का हिस्सा है जो बंगाल की शांति भंग करना चाहती है।
इस पूरे मामले ने अब दिल्ली तक हलचल पैदा कर दी है। भारत निर्वाचन आयोग ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने विशेष रूप से मंत्री शशि पांजा के आवास पर हुए हमले और सुरक्षा में हुई चूक पर नाराजगी जाहिर की है। आयोग का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य में पहले से ही केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात हैं, तो उनका उपयोग स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्यों नहीं किया गया?