कोलकाता एयरपोर्ट के 100 साल पूरे, ऐतिहासिक समारोह में जारी होगा स्मारक टिकट और सिक्का
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को आज 100 साल पूरे हो गए। जिसका जश्न आज 21 दिसंबर को मनाया जा रहा है। इस मौके पर स्मारक टिकट और सिक्का भी जारी होगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
कोलकाता एयरपोर्ट फोटो ( सोर्सः सोशल मीडिया )
कोलकाताः अपने कई इतिहासों को समेटे हुए कोलकाता स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट (दमदम एयरपोर्ट) को आज यानी 21 दिसंबर को 100 साल पूरे हो गए। जिसको लेकर पूरे एयरपोर्ट को दुल्हन की तरह से सजाया गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरपु के नेतृत्व में भव्य समारोह आयोजित होगा। इस समारोह में केंद्रीय नागरिक उड्डयन और सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, लोकसभा सदस्य प्रोफेसर सौगत रॉय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव वुमलुनमंग वुअलनाम, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष विपिन कुमार समेत कई अन्य लोग मौजूद होंगे।
स्मारक टिकट और सिक्का भी जारी होगा
कोलकाता एयरपोर्ट ने बीते 100 वर्षों में देश और दुनिया को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है और इसे दुनिया के महान विमानन केंद्रों में गिना जाता है। एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस समारोह के दौरान उड़ान यात्री कैफै का भी उद्घाटन किया जाएगा। जो एक बजट अनुकूल कैफे होगा, जहां पर किफायती मूल्य पर क्यूरेटेड मेनू पेश किया जाएगा। यह कैफे यात्रियों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन प्रदान करेगा। इसके अलावा,कोलकाता एयरपोर्ट के 100 साल पूरे होने के अवसर पर एक स्मारक टिकट और सिक्का भी जारी किया जाएगा। साथ ही, भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक हवाई अड्डा वास्तुकला को प्रदर्शित करने वाली एक कॉफी टेबल बुक भी लॉन्च की जाएगी।
1924 में हुई थी एयरपोर्ट की स्थापना
आपको बता दें कि 1924 में स्थापित कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट 1566.3 एकड़ में फैला हुआ है और सालाना 26 मिलियन यात्रियों की मेजबानी करता है। यह एयरपोर्ट लगभग 49 घरेलू और 15 अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों को सेवा देता है। इसका एक नाम दमदम एयरपोर्ट भी है। इसकी स्थापना 1924 में हुई थी। इसने बंगाल फ्लाइंग क्लब (1929) की मेजबानी करके भारतीय विमानन का नेतृत्व किया था। ।
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एयरपोर्ट ने 1964 में भारत का पहला जेट सर्विस हब बनने और 1975 में अपना पहला समर्पित एयरलाइन कार्गो टर्मिनल खोलने जैसे कई ऐतिहासिक मील के पत्थर हासिल किए हैं। 1995 में इसका नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया और 2013 में यहां नए एकीकृत टर्मिनल का उद्घाटन हुआ, जो विरासत और नवाचार का अनूठा मिश्रण है। यह हवाई अड्डा न केवल भारत की विमानन यात्रा का साक्षी रहा है बल्कि इसे प्रगति, कनेक्टिविटी और दृढ़ता का प्रतीक भी माना जाता है।
