पुराने भाजपाई हैं हुमायूं कबीर…मस्जिद बनाकर खोद रहे ममता की सियासी कब्र, ‘बाबरी बवाल’ के पीछे BJP?
Humayun Kabir: साल 2018 में हुमायूं कबीर बीजेपी में शामिल हुए थे। उनकी लोकप्रियता को देखते बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मुर्शिदाबाद सीट से उम्मीदवार बनाया था।
- Written By: अभिषेक सिंह
हुमायूं कबीर (डिजाइन फोटो)
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में टीएमसी से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर को लेकर हंगामा मचा हुआ है। कबीर ने शनिवार को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी। इस कार्यक्रम में 200,000 से ज़्यादा लोग हाथों में ईंटें लिए हुए जमा हुए थे। विवाद बढ़ने पर टीएमसी ने कबीर को पार्टी से निकाल दिया।
इस मुद्दे पर टीएमसी और भाजपा नेताओं के बीच लगातार बयानों का आदान-प्रदान हो रहा है। भाजपा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साध रही है और कह रही है कि वह आग से खेल रही हैं। इस बीच, हुमायूं कबीर को पहले ही टीएमसी से निकाल दिया गया है। कबीर लंबे समय से भाजपा के सदस्य हैं।
बीजेपी-टीएमसी के बीच छिड़ी जंग
टीएमसी का दावा है कि हुमायूं कबीर भाजपा के एजेंट हैं, जबकि भाजपा का दावा है कि टीएमसी के अंदर ही झगड़ा है। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि हुमायूं कबीर कभी भाजपा के सदस्य थे और उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव भी भाजपा के टिकट पर लड़ा था।
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कांग्रेस से शुरू हुआ सियासी सफर
हुमायूं कबीर ने अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस पार्टी से शुरू किया था और विधायक बने थे। इसके बाद वे टीएमसी में शामिल हो गए। जहां ममता बनर्जी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया, लेकिन तीन साल के अंदर ही उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए पार्टी से निकाल दिया गया।
BJP के टिकट पर लड़ा 2019 चुनाव
साल 2018 में हुमायूं कबीर बीजेपी में शामिल हो गए। लोकप्रियता को देखते हुए हुमायूं कबीर को बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मुर्शिदाबाद सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा और वो छठवें पायदान पर आए थे।
2021 में फिर की टीएमसी में वापसी
यही वजह है कि हुमायूं कबीर ज्यादा समय तक भाजपा में नहीं रहे। साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वह टीएमसी में वापस आए और भरतपुर सीट से विधायक बने। इस बार उनके बयानों से विवाद हुआ और पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निकाल दिया।
बंगाल में मचे बवाल के पीछे बीजेपी?
भाजपा से पुराना नाता होने के नाते सियासी गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि बंगाल में ‘बाबरी स्टाइल मस्जिद’ वाले बवाल के पीछे भाजपा का हाथ तो नहीं है? क्योंकि चुनावी दौर में सियासी पार्टियां विरोधी दलों को मात देने के लिए साम-दाम-दंड-भेद जैसे सभी तरीके अपनाती हैं। वहीं, टीएमसी भी कबीर को बीजेपी ऐजेंट बता रही है।
हुमायूं कबीर का विवादों से पुराना नाता
गौरतलब है कि हुमायूं कबीर का विवादों से पुराना नाता रहा है। नवंबर 2024 में टीएमसी में रहते हुए उन्हें पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल सरकार का डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनाने की मांग करने पर नोटिस जारी किया गया था।
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बाबरी मस्जिद के लिए हुमायूं कबीर के शिलान्यास समारोह में मुर्शिदाबाद और आस-पास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। सऊदी अरब के धार्मिक नेता भी शामिल हुए थे। हुमायूं कबीर ने कहा है कि मस्जिद तीन साल के अंदर पूरी हो जाएगी। कहा जा रहा है कि वह अपनी पार्टी बना सकते हैं और विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर उम्मीदवार उतार सकते हैं।
