बंगाल में नहीं चलेगी ममता की मनमानी! चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर उठाया एक और बड़ा कदम, टेंशन में TMC
Bengal SIR: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जा रहा है। हाल में लाखों लोग के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। ऐसा अलग-अलग गड़बड़ियों की वजह से किया गया।
- Written By: रंजन कुमार
पीएम मोदी, सीएम ममता बनर्जी।
Mamata Banerjee: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को बिल्कुल पारदर्शी बनाने के लिए अब केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में तैनात करेगा। आयोग के अनुसार कर्मचारियों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने तक बंगाल में अपनी सेवा देनी होगी। आयोग ने शुक्रवार को कहा कि इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। बता दें, इससे पहले चुनाव आयोग ने बंगाल निर्वाचन आयोग के कई अधिकारियों और पदाधिकारियों को इस कार्य से अलग किया था। साथ ही कई अधिकारियों का तबादला किया गया था। उनके खिलाफ निष्पक्ष रूप से काम नहीं करने की शिकायतें आ रही थीं।
निर्वाचन आयोग को इस बात का अंदेशा है कि राज्य सरकार अपने रसूख का इस्तेमाल कर स्थानीय कर्मचारियों से काम को प्रभावित कर सकती है। आयोग का इशारा प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर रहा है। दूसरी ओर टीएमसी सरकार लगातार एसआईआर का विरोध कर रही है। वो चुनाव आयोग और भाजपा पर धांधली के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने का आरोप लगा रही है।
भाजपा नेता ने की थी मांग
बंगाल के भाजपा नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर का दूसरा चरण पूरे पुनरीक्षण का सबसे अहम हिस्सा है। इसी पर निर्भर करेगा कि अंतिम मतदाता सूची कितनी सटीक, निष्पक्ष और छेड़छाड़ मुक्त होगी। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान अनुचित प्रभाव और हस्तक्षेप की शिकायतें आ रही हैं, जो एसआईआर की विश्वसनीयता को खतरे में डालती हैं।
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CCTV कैमरों की निगरानी में सुनवाई की मांग
भाजपा नेता ने आयोग से अपील है कि पूरा स्क्रूटनी चरण और सुनवाई सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराई जाए। सीसीटीवी फुटेज को एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखा जाए। उनके अनुसार यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और किसी प्रकार की हेराफेरी की संभावनाओं को खत्म करेगा। यह भी कहा था कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि माइक्रो ऑब्जर्वर केंद्रीय कर्मचारियों में से हों, जिससे राजनीतिक दबाव की कोई गुंजाइश नहीं रहे। भाजपा का दावा है कि इससे मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बढ़ेगा।
