न मोदी…न नितिन नबीन, ये हैं BJP के 5 धुरंधर; जिन्होंने बंगाल से उखाड़ फेंका ममता का साम्राज्य
West Bengal Elections: राजस्थान में सात बार के विधायक और नेता प्रतिपक्ष रहे राजेंद्र राठौड़ को अमित शाह और सुनील बंसल के करीबी के रूप में जाना जाता हैं। इस बार उन्हें भवानीपुर सीट की कमान मिली थी।
- Written By: मनोज आर्या
बंगाल में बीजेपी की जीत के 5 बड़े चेहरे, (कॉन्सेप्ट फोटो- AI)
5 Heroes of BJP’s victory in West Bengal: पश्चिम बंगाल के लिए 4 मई, 2026 की तारीख किसी ऐतिहासिक दिन से कम नहीं है। लंबे समय से राज्य में सियासी जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी, इसी दिन 15 साल की ममता सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने में सफल रही। 2016 विधानसभा चुनाव में सिर्फ 3 सीटें जीतने वाली भाजपा ने 10 सालों में पूरे समीकरण को बदला दिया और 2026 में 207 सीटें जीतकर पहली बार बंगाल में सरकार बनाने जा रही है।
इस चुनाव में भाजपा को मिली जीत को लेकर तमाम दावें किए जा रहे हैं। कोई मोदी का मैजिक, तो कोई ममता बनर्जी के 15 साल के कार्यकाल की विफलता करार दे रहा है। फिलहाल, हम बीजेपी के उन 5 चेहरों के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिनकी कुशल रणनीति और जमीनी मेहनत ने बंगाल में नया इतिहास लिख दिया।
‘बंगाल फतह’ का पहला किरदार
बंगाल में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत का पहला किरदार हैं गृहमंत्री अमित शाह। 2021 विधानसभा चुनाव में जिन वजहों से पार्टी की हार हुई थी, उन्हीं से अमित शाह ने बीजेपी के जीत की सियासी पटकथा लिखी। पिछली बार 2 मई 2021 को बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। दो दिन बाद चुनावी नतीजे की समीक्षा हुई। अमित शाह ने सुनील बंसल और शिवप्रकाश को जुलाई के पहले हफ्ते तक डिटेल रीव्यू रिपोर्ट बनाने को कहा। इस रिपोर्ट में हार की तीन वजह साफ हुईं।
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- चुनाव के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में टीएमसी की हिंसा का डर।
- कई सीटों पर घुसपैठियों ने BJP की रणनीति की TMC तक पहुंचाई।
- बंगाल में बूथ लेवल तक पार्टी कैडर को मजबूत करने की जरूरत।
ऐतिसाहिक जीत का दूसरा किरदार
2026 में बंगाल के अंदर बीजेपी की आई सुनामी के दूसरा किरदार हैं सुनील बंसल। साल 2023 से वह लगातार ग्राउंड वर्क कर रहे थे और 2025 में ही उन्होंने बंगाल के लिए प्लान तैयार कर लिया था। 2023 पंचायत से पहले अमित शाह फरवरी और अप्रैल में यहां 4-5 दौरे किए और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इसके बाद सुनील बंसल को पंचायत चुनाव की कमान संभालने के लिए बंगाल भेजा। उन्हें 2026 के विधानसभा चुनाव तक वहीं डेरा डालने का आदेश मिला। मकसद पहले पंचायत चुनाव, फिर लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव साधना था।
(बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के पीछे वो 5 बड़े चेहरें)
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के मुताबिक, इन 3 सालों में सुनील बंसल और अमित शाह के बीच सैकड़ों बैठकें हुईं। जनवरी 2025 से लेकर वोटिंग के पहले तक इन बैठकों का दौर बढ़ गया था। सुनील बंस हर हफ्ते दिल्ली का चक्कर लगाते और बंगाल के हर छोटे-बड़े घटनाक्रम की जानकारी अमित शाह को देते थे। उन्होंने अपने भरोसेमंद लोगों की टीम बनाई, जिसमें राजस्थान के 15-18 सीनियर कार्यकर्ता और नेता चुने गए।
ममता के किला को ढहाने की कमान
राजस्थान में सात बार के विधायक और नेता प्रतिपक्ष रहे राजेंद्र राठौड़ अमित शाह और सुनील बंसल के करीबी हैं। उन्हें भवानीपुर सीट की कमान सौंपी गई। मीडिया से बातचीत में राजेंद्र ने बताया कि मैं चुनाव से 2-3 महीने पहले ही भवानीपुर आ गया था। मेरी टीम उसके पहले से यहां काम कर रही थी। डर के माहौल, गंदी नालियां और कचरे के ढेर को हमने मुद्दा बनाया। हमने कहा कि क्या ममता बनर्जी के इलाके के लोग गंदी नालियों और कचरे के ढेर के बीच रहने के हकदार हैं?
(राजेंद्र राठौड़, जिन्होंने ममता का किला धवस्त करने में अहम भमिका निभाई)
उन्होंने आगे कहा कि ये गुजरातियों और मारवाड़ियों का इलाका है। पिछले चुनाव में जिन पर BJP को वोट डालने का शक था, नतीजे आने के बाद उनके घर की पाइपलाइन कटवा दी गई थी। उनके घरों के सामने कचरा फेंकवा दिया गया था। काउंसलर्स ने इनसे माफीनामा लिखवाया था। इस बार हमने ये डर खत्म किया।
पश्चिम बंगाल में जीत का तीसरा किरदार
बंगाल में बीजेपी के अभूतपूर्व प्रदर्शन के पीछे तीसरा किरदार हैं शिवप्रकाश सिंह। BJP में राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश सिंह बंगाल की कोर टीम के अहम किरदार थे। उनका काम RSS कार्यकर्ताओं और BJP के बीच तालमेल बैठाना था। 2021 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले उन्होंने बंगाल को अपना ठिकाना बनाया। वे अब तक वहीं डटे हैं। उन्होंने राइट विंग को एक्टिव किया। VHP, RSS, बजरंग दल और हिंदूवादी दूसरे संगठनों को सक्रिय रखा। इसके अलाना उन्होंने और कई गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। जैसे कि-
धार्मिक संगठनों से बातचीत: जैसे नादिया में इस्कॉन का प्रभाव है, तो उनके साथ कई कार्यक्रम किए। इसी तरह हर क्षेत्र में प्रमुख मठों और मंदिरों के लोगों से संपर्क कर कार्यक्रम किए और वहां आने-जाने वालों से संपर्क बढ़ाया।
व्यापारी वर्ग से बातचीत: कमीशनखोरी से परेशान व्यापारी वर्ग के साथ गुपचुप मीटिंग कीं। ये वर्ग ममता दीदी के साथ दिखा, लेकिन इनका मन चुनाव करीब आते-आते बदलता गया।
संघ ने 2 लाख से ज्यादा बैठकें कीं: RSS और उसके आनुषांगिक संगठनों ने हर वर्ग के साथ पिछले 3 साल में 2 लाख छोटी-बड़ी बैठकें कीं।
(शिवप्रकाश सिंह, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री, बीजेपी)
ममता का किला धवस्त करने वाला चौथा किरदार
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स का नेटवर्क खड़ा किया। पूरे राज्य में छोटे-बड़े मिलाकर 3000 से ज्यादा इंफ्लुएंसर हायर किए गए। क्राइटेरिया ये रखा गया कि इंफ्लुएंसर के पास कम से कम 5 हजार फॉलोअर्स हों। इन्हें स्टोरी और महीने के हिसाब से पैसा दिया गया। इंफ्लुएंसर्स की टीम पिछले 4 महीने से राज्य के 4 और 5 स्टार होटलों में रहकर काम कर रही है।
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बंगाल में BJP की जीत का पांचवा किरदार
बंगाल में ममता को सत्ता से उखाड़ फेंकने वालों में 5 किरदार हैं भूपेंद्र यादव। मंडल स्तर पर 4-5 महीने पहले 20 से 30 हजार रुपये की सैलरी पर लोगों की नियुक्ति की गई। इन्होंने बूथ स्तर पर अपनी टीमें बनाई और इन लोगों को हर महीने 500 से 2000 रुपये दिए गए। इसके अलावा खाना-पीना और पेट्रोल दिया गया।
