Bengal Chunav: बंगाल में BJP पर क्यों भारी पड़ती है TMC? जानिए किस ‘ब्रह्मास्त्र’ से मोदी को मात देती हैं ममता
Bengal Chunav को लेकर ओपिनियन पोल सामने आया है जिससे पता चलता है कि ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए हैं। अब सवाल यह है कि ममता के पास कौन सा ब्रह्मास्त्र है? जिससे वह BJP को मात देने में कामयाब हो जाती हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह
ममता बनर्जी व नरेंद्र मोदी (कॉन्सेप्ट फोटो)
Mamata Banerjee vs BJP: पश्चिम बंगाल में चुनावों की घोषणा हो गई है। 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है तथा 4 मई को नई सरकार बनने वाली है। बीजेपी इस चुनाव को लेकर बहुत आशावादी है और मानती है कि वह 2021 के मुकाबले इस बार और भी ज़्यादा मज़बूत होकर उभरेगी। वहीं, ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में आने के लिए चुनावी मैदान में उतर रही हैं।
ममता बनर्जी केंद्र सरकार के प्रति अपने टकराव वाले रवैये और अपने तेज मिजाज के लिए जानी जाती हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने जोरदार प्रचार किया था और चुनावी मुकाबले में लगातार तीसरी बार जीत हासिल की थी। हालांकि, वह अपनी खुद की नंदीग्राम सीट सुवेंदु अधिकारी से हार गई थीं।
BJP पर क्यों भारी पड़ती हैं ममता?
चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही एक ओपिनियन पोल भी सामने आया है जिससे पता चलता है कि ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए हैं। अब सवाल यह उठता है कि सत्ता में तीन कार्यकाल बिताने के बाद भी टीएमसी और ममता इतनी मजबूत क्यों बनी हुई हैं?
सम्बंधित ख़बरें
नवभारत विशेष: व्यापार समझौते से विकास की नई शुरुआत, आज भारत विश्वसनीयता की स्थिति के साथ करता है वार्ता
डायमंड हार्बर और मगरहाट में दोबारा मतदान शुरू, मतदान केंद्रों पर सुरक्षाकर्मियों का कड़ा पहरा
4 मई से पहले बड़ा धमाका! TMC की इंटरनल रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, किसे मिल रहीं 200 से ज्यादा सीटें?
नागपुर में गरजे वडेट्टीवार, बंगाल में भाजपा ने की लोकतंत्र की हत्या, अब जनता पर महंगाई का प्रहार
3 योजनाओं से साध लिया हर वर्ग
ममता की मजबूती के पीछे तीन योजनाओं और तीन फैक्टर्स की बड़ी वजह माना जाता है। लक्ष्मी भंडार, स्वास्थ्य साथी और युवा साथी योजना के जरिए ममता बनर्जी ने महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में पैठ बना ली है। इसके अलावा उन्होंने ‘SIR’ को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की है, जिसका मकसद इन मामलों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मतदाताओं के गुस्से को अपने पक्ष में भुनाना है।
‘बांग्ला अस्मिता’ वाला ‘ब्रह्मास्त्र’
फैक्टर्स की बात करें तो ममता बनर्जी को महिलाओं के बीच लोकप्रिय माना जाता है। हालांकि आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप कांड के बाद उनकी पार्टी को कड़ी आलोचना और सवालों के बावजूद राज्य की महिलाएं उन पर अपना भरोसा बनाए हुए हैं। इसके अलावा ‘बांग्ला अस्मिता’ के मुद्दे को भी ममता बने बखूबी भुनाया है।
‘दिल्ली vs बंगाल’ वाला नैरेटिव
अलग-अलग मुद्दों को ममता ने ‘दिल्ली बनाम बंगाल’ के नज़रिए से पेश करने की कोशिश की है। ऐसा करके उन्होंने बंगाली पहचान को और मजबूत और एकजुट करने की कोशिश की है। दूसरी तरफ भाजपा के लिए ‘बांग्ला अस्मिता’ का दांव कमजोर पड़ जाता है।
यह भी पढ़ें: Bengal Pre Election Survey: बंगाल में अबकी बार किसकी सरकार? ओपिनियन पोल ने दे दिया जवाब, जानिए किसे लगेगा झटका
बीजेपी के पास चेहरे का अभाव
बंगाल में भाजपा के पास ममता बनर्जी जैसे वोटरों को अपनी ओर खींचने एकजुट करने वाले बड़े चेहरे का अभाव है। वह राज्य में भी मोदी के चेहरे पर निर्भर है। शिक्षकों की भर्ती में घोटाला और आरजी कर रेप और मर्डर केस बीजेपी को मुद्दे जरूर दिए हैं लेकिन वह उन्हें भुनाने में नाकाम रही है। इसके अलावा भाजपा घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बना रही है।
