4 मई से पहले बड़ा धमाका! TMC की इंटरनल रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, किसे मिल रहीं 200 से ज्यादा सीटें?
West Bengal Assembly Elections: पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि जमीन पर लहर एग्जिट पोल के आंकड़ों से काफी अलग है। सीएम ममता ने कार्यकार्ताओं को मतगणना केंद्रों पर डटे रहने का निर्दश दिया है।
- Written By: मनोज आर्या
सीएम ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
West Bengal Assembly Elections 2026 Seat Prediction: पश्चिम बंगाल की सियासत में 4 मई का दिन काफी अहम होने वाला है। इसलिए राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ-साथ आम जनता भी काफी बेसब्री से उस दिन का इंतजार कर रहे हैं। चुनावी नतीजों से पहले सामने आए एग्जिट पोल के आंकड़ों ने भाजपा को बहुमत देकर भगवा खेमे में उत्साह बढ़ा दिया है। हालांकि, टीएमसी प्रमुख और सीएम ममता बनर्जी ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने का दावा किया है।
इस बीच ‘द वॉल’ (The Wall) मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी के दो ताकतवर केंद्रों कालीघाट और कैमक स्ट्रीट से सामने आई इंटरनल रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है। इस रिपोर्ट में टीएमसी की जीत का जो गणित समझाया गाय है, वह किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी है।
जमीनी स्तर काफी अलग आंकड़े
पार्टी के रणनीतिकारों का ऐसा मानना है कि जमीन पर लहर एग्जिट पोल के आंकड़ों से काफी अलग है। ममता बनर्जी ने कार्यकार्ताओं को मतगणना केंद्रों पर सख्ती से डटे रहने का निर्देश दिया है, क्योंकि उनका मानना है कि टीएमसी एक बार फिर दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार में वापसी करेगी। यह लड़ाई अब केवल वोटों की नहीं, बल्कि साख और दावों की बन चुकी है।
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‘ग्रे-जोन’ में 43 विधानसभा सीटें
कालीघाट के नजदीकी सूत्रों के मुताबिक, द वॉल ने अपनी रिपोर्ट में बताय है कि टीएमसी राज्य के सभी 294 सीटों का विस्तार से विशलेषण किया है। पार्टी के इंटरनल सर्वे में करीब 43 सीटें ऐसी है जिन्हें ‘ग्रे जोन’ यानी कम मार्जिन से जीत-हार तय करने करने वाला माना गया है। इन सीटों कोई भी पहले से दावा नहीं ठोक सकता है। इन 43 सीटों को ममता बनर्जी की पार्टी 50-50 के रेश्यो में देख रही है। इसका मतलब यह है कि अगर माहौल थोड़ा भी पक्ष में रहा, तो यहां टीएमसी को फायदा मिल सकता है।
‘ग्रे जोन’ में शामिल इन सीटों पर कुछ हाई-प्रोफाइल चेहरे भी शामिल हैं, जिनपर सभी की नजरें हैं। टीएमसी का ऐसा अनुमान है कि अगर सबसे खराब स्थिति भी रही, तो भी पार्टी 174 सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर लेगी। वहीं, भाजपा को लेकर इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि वे अधिकतम 71 सीटों पर जीत सकती है। यह रिपोर्ट बताती है कि कालीघाट में हार का डर नहीं, बल्कि जीत के अंतर को लेकर मंथन चल रहा है।
कितने सीटों पर जीतेगी टीएमसी?
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले कैमक स्ट्रीट कैंप का सर्वे कालीघाट से भी कहीं ज्यादा उत्साहजनक है। द वॉल मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के करीबियों का दावा है कि टीएमसी 209 से 229 सीटों के बीच शानदारी जीत दर्ज केरगी। इस सर्वे में यह भी बताया गया है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों जैसे कि मुर्शिदाबाद में पार्टी की बंपर जीत होने वाली है और वहां 17 सीटों पर टीएमसी को बढ़त मिलेगी। बीरभूम जैसे जिलों में भाजपा के लिए एक सीट पर जीत मिलने की बात कही गई है।
कैमक स्ट्रीट के रणनीतिकारों का कहना है कि इस बार साइलेंट वोटर खासकर महिलाएं, ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी रही हैं। ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं का असर वोटिंग मशीनों में कैद हो चुका है। रणनीतिकारों का कहना है कि शहरी इलाकों में भी भाजपा की पकड़ ढीली हुई है, जिसका सीधा फायदा टीएमसी को मिलने जा रहा है। यह रिपोर्ट पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर रही है।
नए चेहरों पर पार्टी ने जताया भरोसा
2026 विधानसभा चुनाव में हुगली जिला तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा चिंता बना हुआ था, लेकिन इंटरनल रिपोर्ट में कहानी कुछ अलग ही सामने आ रही है। द वॉल की रिपोर्ट के माने तो, हुगली की कुल 18 सीटों में से 15 पर टीएमसी जीत रही है। गौरतलब है कि पार्टी ने यहां 10 सीटों पर मौजूदा विधायकों को टिकट न देकर नए चेहरों पर विश्वास जताया है। इंटरनल रिपोर्ट का यह कहना है कि ‘एंटी-इंकंबेंसी’ को रोकने के लिए किया गया यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है।
राजनीतिक जानकारों का ऐसा मानना था कि हुगली में बीजेपी सेंध लगा सकती है, लेकिन कैमक स्ट्रीट की रिपोर्ट ने इन कयासों पर पानी फेर दिया है। अगर हुगली के नतीजे इस आंतरिक सर्वे के मुताबिक आते हैं, तो यह साबित हो जाएगा कि ममता बनर्जी की सांगठनिक पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी 2021 में थी। यह जिला सत्ता की चाबी साबित हो सकता है।
कोलकाता में क्लीप स्विप का दावा
कोलकाता और दक्षिण 24 परगना हमेशा से तृणमूल के सबसे मजबूत गढ़ रहे हैं और इस बार भी यहां कोई बदलाव होता नहीं दिख रहा है।पार्टी के इंटरनल सर्वे में दावा किया गया है कि कोलकाता की 11 सीटों में से 10 पर टीएमसी एकतरफा जीत रही है। वहीं, दक्षिण 24 परगना की 31 सीटों में से 30 सीटें तृणमूल कांग्रेस के खाते में जा रही है। भाजपा के लिए यहां पैर जमाना नामुमकिन जैसा लग रहा है।
हावड़ा जिले में भी 16-0 का स्कोर रहने का अनुमान लगाया गया है। यानी पूरे शहरी और अर्ध-शहरी बेल्ट में ममता बनर्जी की लहर बरकरार है। अगर ये आंकड़े सच साबित होते हैं, तो भाजपा का 200 पार का नारा महज एक सपना बनकर रह जाएगा। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर पूरा भरोसा है कि उनका वोट बैंक सुरक्षित है और उसमें कोई सेंध नहीं लगी है।
अल्पसंख्यक वोटों का TMC के लिए फायदा
मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिले, जो कभी कांग्रेस और लेफ्ट के गढ़ हुआ करते थे, वहां अब टीएमसी का पूरी तरह से कंट्रोल दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस सभी 17 सीटों पर जीत की उम्मीद कर रही है। भाजपा का ध्रुवीकरण का कार्ड यहां काम करता नहीं दिख रहा है। द वॉल की रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक वोटों का बिखराव रुकने से टीएमसी को सीधा फायदा पहुंचा है।
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4 मई को सामने आएंगे असली आंकड़े
उत्तर 24 परगना में जरूर कुछ सीटों का नुकसान होने की आशंका जताई गई है, लेकिन उसकी भरपाई अन्य जिलों से होने की उम्मीद है। कालीघाट और कैमक स्ट्रीट के रणनीतिकार इस बात पर एकमत हैं कि बंगाल की जनता ने एक बार फिर ‘स्थानीय’ बनाम ‘बाहरी’ की लड़ाई में अपनी बेटी को ही चुना है। अब बस 4 मई का इंतजार है जब ये गुप्त आंकड़े आधिकारिक मुहर के साथ दुनिया के सामने आएंगे।
