Disabled Woman Uber Video : नोएडा की एक दिव्यांग महिला ने आरोप लगाया है कि उबर ड्राइवर ने व्हीलचेयर को कार में रखने से मना कर उन्हें कैब से उतरने के लिए कहा।
वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Disabled Woman Viral Video : उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक दिव्यांग महिला के साथ कथित तौर पर हुई घटना ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। प्रतिष्ठा देवेश्वर शर्मा नाम की महिला ने आरोप लगाया है कि एक उबर ड्राइवर ने उनकी व्हीलचेयर को कार में रखने से इनकार कर दिया और उन्हें कैब से उतरने के लिए कह दिया।
महिला ने इस घटना का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @iampratishtha पर साझा किया, जिसके बाद मामला तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में महिला अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहती हैं कि उन्हें अपनी व्हीलचेयर के साथ दूसरी कैब बुक करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनका आरोप है कि ड्राइवर को अपने व्यवहार पर कोई पछतावा भी नहीं था।
दिव्यांग महिला को उबर ड्राइवर ने गाड़ी में बैठने से रोका
महिला ने वीडियो में कहा कि दिव्यांग लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है। उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से इस मुद्दे को उठाने और संबंधित कंपनी तक पहुंचाने की अपील की। अपने पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं, लेकिन अभी तक कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
उन्होंने कहा कि अगर परिवहन सेवाएं दिव्यांग यात्रियों की जरूरतों को समझने और उनके लिए सुविधाएं सुनिश्चित करने में विफल रहती हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। इस घटना के बाद सुलभ परिवहन और दिव्यांग-अनुकूल सेवाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ड्राइवर के व्यवहार की आलोचना करते हुए कार्रवाई की मांग की
वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने महिला के समर्थन में प्रतिक्रिया दी है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने ड्राइवर के व्यवहार की आलोचना करते हुए कंपनियों से अपने ड्राइवरों को संवेदनशीलता और बुनियादी शिष्टाचार का प्रशिक्षण देने की मांग की। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं में दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष विकल्प और सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
वहीं कुछ यूजर्स का मानना था कि यदि वाहन में व्हीलचेयर रखने की पर्याप्त जगह नहीं थी तो ड्राइवर की भी कुछ व्यावहारिक सीमाएं हो सकती हैं। हालांकि अधिकांश प्रतिक्रियाओं में दिव्यांग यात्रियों के प्रति अधिक संवेदनशील और समावेशी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन और निजी कैब सेवाओं में दिव्यांगजनों की पहुंच और अधिकारों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।