82 साल की उम्र में भी नहीं मानी हार, फुटपाथ पर नमकीन बेचकर परिवार चला रहे मनसुख काका की कहानी वायरल

Mansukh Kaka Viral Story : मुंबई के 82 वर्षीय मनसुख काका कोविड के बाद नौकरी छूटने के बावजूद हार नहीं माने। आज वह रोजाना 12 घंटे फुटपाथ पर घर के बने फरसान और नमकीन बेचकर परिवार का गुजारा कर रहे हैं।
At 82, Mansukh Kaka works 12 hours daily selling homemade snacks, inspiring thousands with his resilience and dedication.
वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Street Vendor Inspirational Story : मुंबई के बोरीवली वेस्ट में रहने वाले 82 वर्षीय मनसुख काका इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। उम्र के इस पड़ाव में, जब अधिकांश लोग आराम की जिंदगी की उम्मीद करते हैं, मनसुख काका रोजाना लगभग 12 घंटे फुटपाथ पर बैठकर घर के बने फरसान, खाखरा, चकली और अन्य नमकीन बेचते हैं।

कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी और उनके बेटे की नौकरी चली गई थी, जिसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत के दम पर परिवार का सहारा बने हुए हैं। उनकी कहानी को मुंबई की कंटेंट क्रिएटर आराधना चटर्जी ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

82 वर्षीय मनसुख काका रोज 12 घंटे बेचते हैं स्नैक्स

वीडियो में मनसुख काका अपने स्टॉल पर ग्राहकों का मुस्कुराकर स्वागत करते नजर आते हैं। उनकी बहन घर पर ताजा स्नैक्स तैयार करती हैं और काका उन्हें बेचते हैं। सबसे खास बात यह है कि वह आज भी हर लेन-देन का हिसाब एक छोटी डायरी में बेहद सावधानी से लिखते हैं।

उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मसम्मान ने लोगों का दिल जीत लिया है। बताया जाता है कि पूरे दिन की मेहनत के बाद उनकी औसत कमाई लगभग 300 रुपये होती है, लेकिन इसके बावजूद उनके चेहरे पर शिकायत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और संतोष दिखाई देता है। वीडियो देखने वाले लोग उनकी लगन और जज्बे की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

मनसुख काका की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल

वायरल वीडियो में मनसुख काका का एक बयान भी लोगों को काफी प्रेरित कर रहा है। वह कहते हैं, "रिटायरमेंट उम्र का नहीं, स्थिति का नाम है। जब तक सांस है, मेहनत जारी रहेगी।" सोशल मीडिया पर उनकी कहानी सामने आने के बाद लोग उनके समर्थन में आगे आ रहे हैं। कई यूजर्स ने उनके स्टॉल का पता पूछकर उनसे सामान खरीदने की इच्छा जताई है।

वहीं कुछ लोगों ने उनकी सादगी, पेशेवर रवैये और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की सराहना की है। मनसुख काका की यह कहानी न केवल संघर्ष और मेहनत की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आत्मसम्मान और हौसला किसी भी उम्र में इंसान को आगे बढ़ने की ताकत दे सकता है।

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