वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट (सोर्स - सोशल मीडिया)
Migrant Indian Worker Abuse : मलेशिया में एक भारतीय व्यक्ति के साथ हुई अमानवीय घटना का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। यह शख्स, 39 वर्षीय सफिउदीन पकीर मोहम्मद, तमिलनाडु का निवासी है, जो अपने परिवार के लिए कमाने के उद्देश्य से 2024 में मलेशिया गया था। सफिउदीन ने क्वालालंपुर के श्री गोंबाक इलाके में एक रेस्टोरेंट में कुक की नौकरी शुरू की थी।
उन्होंने नौकरी पाने के लिए अपने वर्क परमिट के लिए 3,500 रिंगिट और हेल्थकेयर के लिए 1,200 रिंगिट भी दिए थे। लेकिन नौकरी शुरू होने के कुछ समय बाद ही उनकी मुश्किलें बढ़ने लगीं। नियोक्ता ने उनकी तनख्वाह रोकनी शुरू कर दी और कई-कई महीनों तक उन्हें पैसे नहीं मिले। इतना ही नहीं, उनका पासपोर्ट भी नियोक्ता ने अपने पास रख लिया, ताकि वे वापस भारत न जा सकें। जब सफिउदीन ने नौकरी छोड़ने की कोशिश की, तो उन्हें ऐसा करने की आज़ादी भी नहीं दी गई।
Kita berbuat baik ni sewajarnya dengan semua makhluk. Rasulullah ﷺ pun pesan yang sama berkaitan ihsan ni. We never know how our own life will end, so it is wise to act with goodness at all times. Found this post here: https://t.co/al08X94lBf pic.twitter.com/yTqvBT9Nua — Syam (@saifulhisyam) November 24, 2025
तनख्वाह न मिलना, पासपोर्ट जब्त होना और नौकरी छोड़ने की अनुमति न होना, इन सबके बीच सफिउदीन की स्थिति बेहद खराब हो गई। मजबूर होकर उन्होंने करीब छह महीने पहले काम पर जाना बंद कर दिया। पैसे खत्म होने के बाद उनके पास रहने की कोई जगह भी नहीं बची। ऐसे में उन्हें कुआलालंपुर की सड़कों पर रातें गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ दिनों से वे अमबैंक की टमन मलुरी ब्रांच के बाहर फुटपाथ पर सो रहे थे।
इसी दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें देखा गया कि एक महिला सिक्योरिटी गार्ड उन्हें उठाने के लिए उन पर पानी की धार छोड़ रही है। थोड़ी देर बाद एक मोची भी वहां आता है और उन्हें लात मारकर वहां से जाने को कहता है। इस पूरे घटनाक्रम ने लोगों को झकझोर दिया और वीडियो वायरल होते ही लोगों ने इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की। सफिउदीन ने कहा कि अगर उन्हें बस शांति से जाने को कहा जाता, तो वे बिना विरोध के वहां से उठ जाते। लेकिन भूखे, थके और परेशान होने के कारण वे कमजोर पड़ गए थे।
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वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग और सामाजिक संगठनों ने सफिउदीन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। मलेशिया में बेघर लोगों के लिए शेल्टर चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता टोनी लियान ने उन्हें तुरंत आश्रय दिया और उनकी हालत सुधरने तक देखभाल करने का वादा किया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टोनी लियान अब सफिउदीन के नियोक्ता से उनका पासपोर्ट वापस दिलवाने और उनकी बकाया मजदूरी दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, समुदाय के लोग उनके लिए फंड भी इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि सफिउदीन अपने परिवार के पास भारत वापस लौट सकें। इस घटना ने बड़ी संख्या में लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि प्रवासी मजदूर किस तरह कभी-कभी मजबूरी और शोषण का सामना करते हैं।