वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
Nanny Culture in India : मेट्रो शहरों में जिंदगी अब पहले जैसी आसान नहीं रही है। करियर की दौड़, बच्चों की परवरिश और खुद के लिए समय निकालने की जद्दोजहद हर दिन बढ़ती जा रही है। इसी बीच बेंगलुरु की रहने वाली परवीन चौधरी का एक खुलासा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
उन्होंने बताया कि वह अपने 3 और 4 साल के दो बेटों की देखभाल के लिए दो नैनी रखती हैं और हर महीने कुल 46,000 रुपये खर्च करती हैं। यह जानकारी सामने आते ही लोगों के बीच बहस छिड़ गई।
परवीन के अनुसार, पहली नैनी को 32,000 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। वह खाना बनाती है, घर की सफाई करती है और बच्चों की देखभाल करती है। जरूरत पड़ने पर वह रात में भी रुकती है। दूसरी नैनी को 14,000 रुपये दिए जाते हैं, जो बैकअप सपोर्ट के रूप में काम करती है।
परवीन का कहना है कि यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं, बल्कि भरोसे और सुकून का रिश्ता है। वह अपनी नैनियों को बच्चों की मौसी जैसा मानती हैं और बताती हैं कि इसी सहयोग की वजह से वह अपना काम संभाल पाती हैं और कभी-कभी सोलो ट्रैवल भी कर लेती हैं।
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सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लोग दो हिस्सों में बंट गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह आधुनिक और व्यावहारिक पैरेंटिंग का उदाहरण है, खासकर उन परिवारों के लिए जहां पति-पत्नी दोनों काम करते हैं। वहीं कुछ ने इसे अनावश्यक खर्च बताया है।
बदलते समय के साथ मेट्रो शहरों में न्यूक्लियर फैमिली और ड्यूल इनकम लाइफस्टाइल आम हो चुका है। ऐसे में बच्चों की देखभाल के लिए नैनी रखना कई परिवारों की जरूरत बन गया है। बहस अपनी जगह है, लेकिन सबसे जरूरी बात यही है कि बच्चे सुरक्षित, खुश और अच्छे माहौल में बड़े हों।