उत्तराखंड हाईकोर्ट, फोटो- सोशल मीडिया
Uttarakhand Cheque Bounce Case: उत्तराखंड में चेक बाउंस के लंबित मामलों को तेजी से सुलझाने के लिए हाईकोर्ट ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। ‘उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025’ के तहत अब पारंपरिक डाक के बजाय डिजिटल माध्यमों से समन भेजे जाएंगे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में चेक बाउंस (Cheque Bounce) के बढ़ते मामलों और उनके लंबित रहने की समस्या को देखते हुए समन जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह आधुनिक बना दिया है। रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार, अब चेक बाउंस मामलों में आरोपियों को ईमेल और वॉट्सऐप के जरिए भी समन भेजा जा सकेगा। यह व्यवस्था ‘उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025’ के प्रावधानों के तहत लागू की गई है, जिसका उद्देश्य अदालती कार्यवाही को सरल और समयबद्ध बनाना है।
इस नई डिजिटल व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ताओं पर कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी डाली हैं। अब चेक बाउंस की शिकायत दर्ज करते समय आरोपी की ईमेल आईडी और वॉट्सऐप नंबर देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, शिकायतकर्ता को एक हलफनामा भी देना होगा जो दी गई डिजिटल जानकारी की सत्यता को प्रमाणित करेगा। हर शिकायत के साथ एक निर्धारित फॉर्मेट में ‘सिंप्सिस’ भी लगानी होगी, जिसे कोर्ट का स्टाफ सीधे कंप्यूटर सिस्टम में फीड करेगा। इसके अलावा, कोर्ट के सॉफ्टवेयर में एक नया ड्राफ्ट टेम्पलेट जोड़ा गया है, जो ‘कॉज ऑफ एक्शन’ के आधार पर लिमिटेशन पीरियड की गणना खुद-ब-खुद कर लेगा।
अदालत ने केवल समन की प्रक्रिया ही नहीं बदली, बल्कि आरोपियों को राहत देने के लिए भुगतान का तरीका भी आसान कर दिया है। अब समन में ही ऑनलाइन भुगतान की सुविधा और उसका सीधा लिंक दिया जाएगा। आरोपी व्यक्ति अपने CNR नंबर या केस की अन्य जानकारी डालकर सीधे चेक की राशि जमा कर सकेगा। यदि आरोपी इस ऑनलाइन माध्यम का उपयोग करके भुगतान कर देता है, तो अदालत ‘कंपाउंडिंग’ के आधार पर मामले को बंद कर सकती है। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि समन जारी करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNNS) की धारा 223 के तहत किसी भी अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय ‘संजबीज तुरी बनाम किशोर एस बरकर’ (Sanjabij Turi vs Kishore S Barkar) के अनुपालन में लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी कि देशभर में लाखों चेक बाउंस केस लंबित हैं, जिससे पूरी न्यायिक प्रणाली पर भारी दबाव पड़ रहा है। हालांकि, इस सुविधा के दुरुपयोग को रोकने के लिए हाईकोर्ट ने सख्त चेतावनी भी दी है। यदि कोई शिकायतकर्ता आरोपी के डिजिटल संपर्क विवरण (ईमेल या वॉट्सऐप) के बारे में गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।