पासी, कुर्मी और ब्राह्मण...सबको साधने की तैयारी! तावड़े की सीक्रेट रिपोर्ट पर मंथन, PM मोदी से मिले पंकज चौधरी

Yogi Cabinet Expansion: योगी मंत्रिमंडल विस्तार और UP में नई टीम के गठन की तैयारी तेज। पंकज चौधरी ने PM मोदी से की मुलाकात। खाली पदों को भरने, जातीय समीकरणों को साधने पर फोकस, जल्द मिल सकती है मंजूरी।
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PM मोदी, पंकज चौधरी (Image- Social Media)
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Pankaj Chaudhary Meets PM Modi: योगी मंत्रिमंडल के विस्तार और प्रदेश भाजपा की नई टीम के गठन को लेकर अंतिम चरण की तैयारियां चल रही हैं। गुरुवार देर रात तक हुई मैराथन बैठकों के बाद शनिवार शाम पंकज चौधरी ने पीएम नरेंद्र मोदी से संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में मुलाकात की। इस बैठक में उत्तर प्रदेश से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक, “टीम योगी” के विस्तार को जल्द मंजूरी मिल सकती है। इसी को लेकर दिल्ली में लगातार मंथन जारी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री पिछले दो दिनों से राजधानी में डेरा डाले हुए हैं। इससे पहले उनकी लंबी बैठक नितिन नबीन और बीएल संतोष के साथ हुई थी।

विनोद तावड़े की लखनऊ यात्रा से हलचल तेज

बताया जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े की लखनऊ यात्रा की रिपोर्ट के बाद यह बैठकों का दौर तेज हुआ। फिलहाल योगी मंत्रिमंडल में 54 मंत्री हैं और अभी भी 6 पद खाली हैं, जिन्हें भरने की तैयारी चल रही है। साथ ही प्रदेश संगठन की नई टीम के गठन और आयोग, निगम व बोर्डों में रिक्त पदों को भरने पर भी विचार हो रहा है। लखनऊ दौरे के दौरान विनोद तावड़े ने पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात कर उनकी राय ली और जमीनी फीडबैक जुटाया। इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है।

सवर्ण वर्ग को भी साधने की जरूरत

सूत्रों का कहना है कि योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी। अवध क्षेत्र में पासी और कुर्मी समुदाय की नाराजगी, साथ ही ब्राह्मणों की असंतुष्टि जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। सुझाव दिया गया कि पिछड़े वर्ग की राजनीति के साथ-साथ सवर्ण वर्ग को भी साधने की जरूरत है।

इसके अलावा, आयोगों, निगमों और बोर्डों में खाली पदों को जल्द भरने की बात भी कही गई है, क्योंकि इसमें पहले ही काफी देरी हो चुकी है। पार्टी को 2014 के चुनावों की तरह अपने सामाजिक समीकरणों को फिर से मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है, क्योंकि कुर्मी, पासी समेत कई जातियों में समर्थन बिखरने की चर्चा सामने आ रही है।

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