RLD के बिना सपा की राह होगी आसान? अखिलेश ने पश्चिमी यूपी के लिए बनाया नया प्लान, UP में क्यों बढ़ी सियासी हलचल
UP Politics: समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव इस बार खास तौर पर उन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं, जहां पिछले चुनावों में पार्टी को सफलता नहीं मिल पाई थी।
- Written By: अभिषेक सिंह
अखिलेश यादव (डिजाइन फोटो)
Samajwadi Party Rally: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी तकरीबन साल भर का वक्त बाकी है, लेकिन राजनैतिक दल रणनीतियां बनाने में अभी से जुट गए हैं। पिछले दो चुनाव में सत्ता से वनवास झेल रही समाजवादी पार्टी के को सत्ता में लाने के लिए अखिलेश यादव नए-नए समीकरण गढ़ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी इस बार खास तौर पर उन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही है, जहां पिछले चुनावों में उसे सफलता नहीं मिल पाई थी। यही वजह है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव 29 मार्च को गौतमबुद्धनगर के दादरी में ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ को संबोधित करने जा रहे हैं।
सपा के मिशन 2027 की शुरुआत!
सपा इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। अखिलेश यादव की रणनीति पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के साथ जाट और गुर्जर मतदाताओं को भी जोड़ने की है। ऐसे में अखिलेश की रैली को पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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सपा के लिए क्यों अहम है यह रैली?
दादरी में आयोजित होने वाली रैली को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सपा के नेता इस रैली में बड़ी संख्या में लोगों को जुटाकर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में लगे हैं। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने साल 2012 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, लेकिन उसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर सकी।
पश्चिमी यूपी में बढ़ी सपा की चुनौती
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को 403 सीटों में से 111 सीटों पर ही जीत मिली थी। उस वक्त राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन के बावजूद पश्चिमी यूपी में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी। इस बार राष्ट्रीय लोकदल का भी साथ नहीं रहेगा। यही वजह है कि अखिलेश ने पश्चिमी यूपी में अभी से मेहनत शुरू कर दी है।
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वेस्टर्न यूपी में गौतमबुद्धनगर जिले की तीनों विधानसभा सीटों नोएडा, दादरी और जेवर पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। ऐसे ही गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर और बागपत जिलों की अधिकतर सीटों पर भी भाजपा को बढ़त मिली थी। इस बार रालोद के साथ न होने से पश्चिमी यूपी में सपा की चुनौती और बढ़ गई है।
पार्टी के दिग्गजों को सौंपी जिम्मेदारी
दादरी में आयोजित होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए पार्टी ने गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जिलों के नेताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी के सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करें।
दादरी में ही क्यों हो रही रैली?
राजनैतिक पंडितों के मुताबिक दादरी और आसपास के इलाकों में जाट और गुर्जर मतदाताओं का खास प्रभाव है। वहीं दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है। इस लिहाज से देखें तो सपा इस रैली के जरिए इन सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
