Assembly Elections 2027: ओवैसी ने सपा से गठबंधन का बढ़ाया हाथ, क्या साथ आएंगे अखिलेश?
UP Assembly Elections 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की इच्छा जताई है।
- Written By: दिव्या सिंह
अखिलेश यादव और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (डिजाइन फोटो)
Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब जोर पकड़ रही हैं। इसी बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन की इच्छा जताकर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। बहराइच दौरे के दौरान ओवैसी ने कहा कि यदि कोई भाजपा को रोकने का प्रयास करता है तो वह उसके साथ आने को तैयार हैं।
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल 2024 लोकसभा चुनाव के बाद नए राजनीतिक समीकरणों पर विचार कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मुस्लिम मतदाताओं का व्यापक समर्थन मिला था, जिससे विपक्ष को उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई थी।
यूपी में AIMIM का प्रदर्शन रहा सीमित
हालांकि, उत्तर प्रदेश में AIMIM अब तक कोई बड़ा चुनावी प्रभाव नहीं छोड़ पाई है। 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। वहीं 2022 चुनाव में करीब 100 सीटों पर लड़ने के बावजूद पार्टी का वोट शेयर 0.43 प्रतिशत ही रहा। हालांकि स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी ने कुछ क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
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सपा के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती
ओवैसी के प्रस्ताव पर सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि भाजपा को हराने वाला कोई भी प्रयास स्वागत योग्य है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को ही लेना होगा। विश्लेषकों के अनुसार, AIMIM को साथ लेने से मुस्लिम वोटों के बंटवारे की संभावना कम हो सकती है, लेकिन इससे भाजपा को ध्रुवीकरण का मुद्दा भी मिल सकता है। सपा फिलहाल अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने पर जोर दे रही है और नहीं चाहती कि चुनाव का केंद्र धार्मिक ध्रुवीकरण बने।
मुस्लिम वोट बैंक पर सपा की मजबूत पकड़
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 19 प्रतिशत मानी जाती है और 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर यह समुदाय चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में है। सपा लंबे समय से मुस्लिम-यादव समीकरण को अपनी राजनीतिक ताकत मानती रही है। ऐसे में पार्टी के भीतर यह धारणा है कि मुस्लिम मतदाता भाजपा को हराने की क्षमता रखने वाले दल के साथ जाएंगे और वर्तमान में सपा इस भूमिका में सबसे मजबूत विपक्षी विकल्प है।
पिछले गठबंधनों से भी सीख ले रही सपा
सपा नेतृत्व छोटे दलों के साथ गठबंधन को लेकर सतर्क दिखाई देता है। पार्टी के भीतर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और सुभासपा जैसे पुराने गठबंधनों का उदाहरण दिया जाता है, जो समय-समय पर राजनीतिक पाला बदलते रहे हैं। यही वजह है कि सपा संगठनात्मक मजबूती और अपने सामाजिक समीकरणों के दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
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अब सबकी निगाहें अखिलेश यादव पर टिकी हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि सपा AIMIM को अपने साथ जोड़ने का फैसला करती है या फिर कांग्रेस के साथ मौजूदा राजनीतिक तालमेल को ही आगे बढ़ाती है।
