राम मंदिर के पुजारियों के वस्त्र का बदला रंग (सोर्स-सोशल मीडिया)
लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर के पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड जारी किया गया है। जिसके मुताबिक अब पुजारी भगवा वस्त्र में नजर नहीं आएंगे। नए ड्रेस कोड के मुताबिक मंदिर के पुजारी अब पीले रंग के धोती, चौबंदी और पगड़ी में नजर आएंगे। इसके अलावा भी मंदिर की सुरक्षा को लेकर नियमों में कुछ बदलाव किए गए है।
इस बात की जानकारी देते हुए ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि पुजारी अब भगवे नहीं बल्कि पीले रंग के वस्त्र में नगए आएंगे। उन्होंने बताया कि सभी पुजारी पहले कुर्ता, पगड़ी और धोती पहनते थे, लेकिन अब उन्हें धोती, चौबंदी और पगड़ी पहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होने बताया कि पगड़ी को सूती से तैयार किया गया है। जिसे सही ढंग से पहनने के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया है।
भारतीय संस्कृति में पीले रंग का काफी महत्व है। इस रंग को पवित्र रंग माना जाता है। सादे कपड़े में भी पीला रंग चढ़ा देने से उस कपड़े को पवित्र कहा जाता है। हिंदू धर्म में सभी शुभ कामों पीला और भगवा रंग का ही इस्तेमाल किया जाता है। ये रंग देवताओं को काफी प्रिय भी माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो पीला रंग इंसान के आंखों को शंकुओं में लम्बे एवं मध्यमक, दोनों तरंग दैर्घ्य वालों को प्रभावित करता है।
बता दें कि 22 जनवरी को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी की गई थी। उससे पहले मंदिर के गर्भगृह में रखी रामलला की नई मूर्ति की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। जिसमें रामलला की तस्वीरें पीले रंग के कपड़े से ढकी हुई थी। हालांकि उसके कुछ दिन बाद रामलला की संपूर्ण तस्वीर भी वायरल हुई थी जिसमे आंखें भी नहीं ढ़की थी। तस्वीर के वायरल होते ही मंदिर के सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे थें।
बता दें कि 5 अगस्त को राम मंदिर का भूमिपूजन और शिलान्यास किया गया था। जिसके दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीले रंग का कुर्ता पहना था। इसके अलाव वहां मौजूद पंडित भगवे रंग के वस्त्र में मौजूद थें। मंदिर को लेकर शुरू से ही विवाद जारी है। पहले निर्माणाधीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होना फिर रामलला की तस्वीरें लीक हो गई। इसके बाद अब मंदिर निर्माण के कुछ महीने बाद ही मंदिर परिसर में पानी लीक होने पर विवाद चल रहा है।
उन्होंने बताया की चौबंदी एक कुर्ता जैसा दिखने वाला कपड़ा होता है, जिसमें कोई बटन नहीं बल्कि रस्सी होती है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला मंदिर के अंदर के फोटो लीक होने के बाद लिया गया है। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि मंदिर में चार मुख्य पुजारी है।
जिन्हें सहायक पुजारियों द्वारा सहायता मिलती है। उन्ही पर सारा काम आता है। लेकिन अब ट्रस्ट की ओर से फैसला लिया गया है कि हर सहायक पुजारी को पांच प्रशिक्षु पुजारी मिलेंगे। जो उनकी मदद करेंगे। सभी पुजारी मिलकर सुबह 3.30 बजे से रात 11 बजे तक मंदिर की सेवा में खड़े रहेंगे। पुजारियों की हर टीम के लिए 5 घंटे की सेवा अनिर्वाय होगी।