फिर विवादों में आया यूपी के सातवीं कक्षा का पेपर, फोटो- सोशल मीडिया
Pandit Word Controversy Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं का नाम आते ही अब विवादों की तस्वीरें भी जेहन में उभरने लगती हैं। ताजा मामला ताजनगरी आगरा का है, जहां सातवीं कक्षा के मासूम बच्चों से संस्कृत के पर्चे में एक ऐसी पहेली पूछी गई, जिसने पूरे राज्य के सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
पुलिस भर्ती परीक्षा के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि शिक्षा विभाग के एक सवाल ने पुरानी आग में घी डालने का काम कर दिया है। एक आम नागरिक और अभिभावक के लिए यह खबर केवल एक सवाल की नहीं, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली की संवेदनशीलता और भाषा के अर्थों के बीच मचे घमासान की है।
मंगलवार को जब आगरा के परिषदीय स्कूलों में कक्षा सात के छात्र संस्कृत की परीक्षा दे रहे थे, तो प्रश्न पत्र के पांचवें नंबर पर दर्ज एक पहेली ने सबका ध्यान खींचा। सवाल कुछ इस तरह था: “वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है?”
जैसे ही यह पर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने इसे हाथों-हाथ लिया और विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संघ का आरोप है कि जानबूझकर एक खास वर्ग की भावनाओं को आहत करने के लिए ऐसे शब्दों का चुनाव किया गया है। शिक्षक नेता बृजेश दीक्षित ने यहां तक दावा किया कि पाठ्यपुस्तक के संबंधित पाठ में ऐसी किसी पहेली का जिक्र ही नहीं है, जिसे विभाग ने आधार बनाया है।
विवाद को बढ़ता देख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डायट प्राचार्य को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। अधिकारियों का तर्क है कि यह कोई नया या अपमानजनक सवाल नहीं है, बल्कि संस्कृत साहित्य की एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध पहेली (प्रहेलिका) है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहाँ ‘पंडित’ का अर्थ किसी जाति विशेष से नहीं, बल्कि ‘विद्वान’ या ‘ज्ञानी’ व्यक्ति से है।
विभाग के मुताबिक, इस पहेली का सही जवाब ‘पत्र’ यानी लेटर है, जो अक्षरों से भरा होने के बावजूद विद्वान नहीं कहलाता और बिना पैर के कोसों दूर पहुंच जाता है। अधिकारियों ने श्लोक का हवाला देते हुए इसे केवल एक शैक्षणिक गतिविधि बताया है, लेकिन शिक्षक संघ इस दलील को मानने को तैयार नहीं है।
यह मामला इतना तूल इसलिए पकड़ रहा है क्योंकि कुछ ही दिन पहले उत्तर प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में भी ‘पंडित’ शब्द को लेकर बड़ा हंगामा हुआ था। उस परीक्षा में एक सवाल के विकल्प के रूप में पंडित शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुद कड़े निर्देश जारी करने पड़े थे।
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अब फिर से वैसा ही विवाद सामने आने पर लोग शिक्षा विभाग की गंभीरता पर सवाल उठा रहे हैं। अभिभावकों का सवाल है कि क्या वाकई परीक्षा सेट करने वाले लोग शब्दों के चयन के समय सामाजिक संवेदनशीलता को भूल जाते हैं? या फिर ये सब केवल एक संयोग मात्र है?
फिलहाल आगरा का प्रशासन इस स्थिति को शांत करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन शिक्षक संघ ने आंदोलन की चेतावनी दे रखी है। सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्न पत्र ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां विभाग इसे विशुद्ध रूप से साहित्यिक ज्ञान बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक संगठनों ने इसे मान-सम्मान की लड़ाई बना लिया है।