लखीमपुर खीरी हिंसा में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गवाह को पुलिस में शिकायत की मिली छूट; मंत्री पुत्र की जमानत बरकरार
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने प्रत्यक्षदर्शी की शिकायत पर कहा कि पुलिस को अपनी रिपोर्ट में पहले निकाले गए निष्कर्षों से प्रभावित हुए बगैर आरोपों की निष्पक्ष ढंग से जांच करनी चाहिए।
- Written By: सौरभ शर्मा
आशीष मिश्रा (फोटो सोर्स - सोशल मीडिया)
लखनऊ: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 2021 में हुए इस बहुचर्चित मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी ने आशीष मिश्रा के खिलाफ गवाही देने के बाद धमकी मिलने की शिकायत की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा आदेश देते हुए गवाह को उत्तर प्रदेश पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराने की अनुमति दे दी है। अदालत ने पुलिस को साफ निर्देश दिए कि वह पूर्व निष्कर्षों से प्रभावित हुए बिना निष्पक्ष जांच करे और जरूरत पड़ने पर नई स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करे।
पीड़ित पक्ष की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि गवाहों को दी जा रही धमकियां बेहद गंभीर मसला हैं और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने से इनकार किया, लेकिन उसे रामनवमी के अवसर पर 5 और 6 अप्रैल को अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी है। मिश्रा को निर्देश दिया गया है कि वह 7 अप्रैल की शाम पांच बजे तक लखीमपुर से लखनऊ लौट आएं और इस दौरान किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल न हों।
जमानत उल्लंघन का आरोप खारिज
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा कि जिस तस्वीर के आधार पर आशीष मिश्रा पर जमानत शर्त तोड़ने का आरोप लगाया गया था, वह पुरानी थी और भ्रामक रूप से प्रस्तुत की गई थी। पुलिस ने बताया कि मिश्रा ने रैली में भाग नहीं लिया। अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया और गवाहों की जांच प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
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गवाहों की सूची पर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस से कहा कि वह गवाहों की लंबी सूची को कम कर केवल मुख्य गवाहों की जांच को प्राथमिकता दे ताकि मामले का निपटारा जल्दी हो सके। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख तय की है। साथ ही स्पष्ट किया कि गवाह अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी। आपको बता दें कि शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें उसने पीड़ितों के इस दावे का खंडन किया कि मिश्रा ने जमानत शर्तों का उल्लंघन करते हुए लखीमपुर खीरी में एक राजनीतिक रैली में भाग लिया था।
