UP में कब होंगे पंचायत चुनाव? हाई कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन से मांगा जवाब, समय पर हुए चुनाव तो किसे होगा नुकसान?

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टाले जाने के मामले को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है और उच्च अदालत ने राज्य चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।
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उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव (डिजाइन फोटो)
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UP Panchayat Chunav: देश के सबसे बड़े सियासी सूबे उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टाले जाने के मामले को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव की तैयारियों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की ओर से दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की गई। याचिका में मांग की गई कि जिला पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पहले पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए विस्तृत और समयबद्ध कार्यक्रम अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

हाई कोर्ट ने पूछा सबसे बड़ा सवाल

इलाहाबाद में मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने की। उच्च न्यायाय ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा कि क्या वह संवैधानिक समयसीमा के भीतर पंचायत चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएगा? साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को दोपहर दो बजे तय की है।

क्या कहता है संविधान का नियम?

संविधान के अनुच्छेद 243E का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार, किसी पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से अधिकतम पांच वर्ष से अधिक नहीं हो सकता। इसलिए यह अनिवार्य है कि चुनाव समय पर कराए जाएं।

राज्य चुनाव आयोग ने क्या कुछ कहा?

पंचायत चुनाव अप्रैल और जून 2026 के बीच होने निर्धारित हैं। राज्य चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12-BB के तहत प्रधान के लिए आम चुनाव या उपचुनाव की तारीख तय करने वाली अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है, जिसे वह राज्य चुनाव आयोग के परामर्श से पूरा करती है।

26 मई से पहले होने चाहिए चुनाव

सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग से पूछा कि क्या 19 फरवरी, 2026 की मौजूदा अधिसूचना के आलोक में वह पंचायत चुनाव कराने की स्थिति में है। न्यायालय ने आगे टिप्पणी की कि मामले के तथ्यों के आधार पर पंचायत चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले संपन्न हो जाने चाहिए।

कब खत्म होगा पंचायतों का कार्यकाल?

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2021 में हुए थे। इस आधार पर ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 2 मई को समाप्त होने वाला है। पंचायत चुनाव अप्रैल और जून 2026 के बीच होने निर्धारित हैं। लेकिन इनका समय पर हो पाना मुश्किल लग रहा है।

क्यों हो रही पंचायत चुनावों में देरी?

पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूचियों के SIR से जुड़ा काम भी 27 मार्च को पूरा होने वाला है। इन मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन उसी दिन होगा। हालांकि सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने शुरू में अप्रैल या मई में पंचायत चुनाव कराने की योजना बनाई थी, लेकिन अब राज्य के प्रशासनिक तंत्र का एक बड़ा हिस्सा जनगणना के हाउस-लिस्टिंग चरण में व्यस्त रहेगा।

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सांकेतिक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)

भाजपा सूत्रों के अनुसार, हाउस-लिस्टिंग का काम सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद है। इसके पूरा होने से पहले पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू करने का इरादा रखती है। नतीजतन समाजवादी पार्टी सहित सभी राजनीतिक दल फिलहाल सितंबर के बाद पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं।

समय पर चुनाव नहीं चाहती सरकार!

भाजपा सूत्रों का संकेत है कि न तो पार्टी और न ही सरकार मूल रूप से तय समय-सीमा पर चुनाव कराने के मूड में है। विधानसभा चुनावों से पहले पंचायत चुनाव कराने में कई राजनीतिक जोखिम शामिल हैं। इससे गांव के स्तर पर पार्टी के अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक रंजिश और बढ़ सकती है।

BJP को सता रहा किस बात का डर?

इसके साथ ही टिकट न मिलने से नाराज पार्टी कार्यकर्ता नामांकन पाने के लिए विरोधी दलों में शामिल हो सकते हैं, जिससे संभावित रूप से पार्टी को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, यदि पार्टी जिला पंचायत सदस्यों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चुनावों में खराब प्रदर्शन करती है तो इसका बाद के विधानसभा चुनावों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

आरक्षण के लिए बनानी होगी कमेटी

राज्य चुनाव आयोग ने पंचायती राज विभाग को एक पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वह पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण कोटे को अंतिम रूप दे और संबंधित सूची जमा करे। इन आरक्षण कोटों को निर्धारित करने के लिए पंचायती राज विभाग को एक समिति गठित करनी होगी। यह समिति पिछले चुनावों के दौरान स्थापित आरक्षण पैटर्न के आधार पर 2026 के चुनावों के लिए आरक्षण कोटे निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार होगी।

आरक्षण कोटा को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग दो महीने लगते हैं। हालांकि, विभाग ने अभी तक इस समिति के गठन की दिशा में शुरुआती कदम भी नहीं उठाए हैं। विभाग के उच्च-अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि पंचायत चुनावों के लिए कोई सक्रिय तैयारी नहीं चल रही है। सरकार के उच्च-स्तरों से भी इस मामले में कोई संकेत नहीं मिला है।

पार्टी से नहीं मिल रहे चुनाव के संकेत

पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े लोगों का भी कहना है कि उन्हें सरकार और पार्टी संगठन से ऐसे संकेत मिले हैं कि फिलहाल चुनाव नहीं होंगे। पंचायत चुनाव विधानसभा चुनावों के बाद ही कराए जाएंगे। यही वजह है कि चुनावों की तैयारियां लगभग ठप पड़ गई हैं। पंचायत चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय भाजपा के पदाधिकारी-कार्यकर्ता फिलहाल SIR और VB GRAM G योजनाओं में व्यस्त हैं।

हाईकमान से 'हरी झंडी' का इंतजार

भाजपा पदाधिकारियों ने बताया कि वे पंचायत चुनावों के संबंध में राष्ट्रीय नेतृत्व से हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। यदि राष्ट्रीय नेतृत्व को लगता है कि चुनाव तय समय पर कराना उचित है तो वे अप्रैल या मई में कराए जाएंगे। अगर केंद्रीय नेतृत्व से पंचायत चुनाव विधानसभा चुनावों के बाद ही कराने की अनुमति मिलती है तो चुनाव स्थगित कर दिए जाएंगे।

...तो नियुक्त किए जाएंगे प्रशासक

ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ज़िला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई के पहले सप्ताह में समाप्त होने वाला है। ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल जुलाई के पहले सप्ताह में समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यदि चुनाव समय पर नहीं कराए जाते हैं, तो प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों की जगह कार्यभार संभालने के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।

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