
-राजेश मिश्र
लखनऊ: योगी सरकार (Yogi Govt.) अब उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh ) में स्टार्ट अप (Start-up) लगाने वाले नौजवानों को एक साल तक प्रोत्साहन भत्ता देगी। पहला उद्यम लगा रहे युवा उद्यमियों को योगी सरकार एक साल तक निश्चित मानदेय देगी। स्टार्ट अप की स्थापना करने वालों को एक साल तक हर महीने 17,500 रुपए के हिसाब से मानदेय दिया जाएगा। इसे प्रोत्साहन भत्ते के तौर पर जाना जाएगा।
वैश्विक निवेशक सम्मेलन से पहले उत्तर प्रदेश सरकार संशोधित स्टार्ट नीति लेकर आएगी। इस नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है जिसमें कई तरह कि सहूलियतें और रियायतें शामिल की गयी हैं। प्रस्तावित नीति के मुताबिक, स्टार्ट अप में नया उत्पाद तैयार करने पर पांच लाख रुपए और उसे बाजार में उतारने पर 7.5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदेश सरकार देगी। इस तरह नीति के तहत स्थापित होने वाले और सभी मानकों को पूरा करने वाले स्टार्ट अप को मानदेय मिलाकर कुल 14.60 लाख रुपए की सरकारी सहायता मिल सकेगी।
प्रदेश के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से तैयार स्टार्ट अप नीति में आधा दर्जन नए क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इनमें महिलाओं के नेतृत्व, सौर ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सर्कुलर इकोनामी, व्यवसायीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव वाले स्टार्ट अप शामिल हैं। जल्द ही इस नीति के मसौदे को मंजूरी के लिए मंत्रिपरिषद में पेश किया जाएगा।
आईटी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में प्रदेश में 52 इन्क्यूबेटर्स काम कर रहे हैं, जबकि 7,200 स्टार्टअप पंजीकृत हैं। नई नीति के जारी होने और वैश्विक निवेशक सम्मेलन के बाद इनकी तादाद में और भी इजाफा हो सकता है। हालांकि प्रदेश में पहले से एक स्टार्ट अप नीति लागू है पर इकोसिस्सटम में बदलाव और नए क्षेत्रों में बढ़ती मांग को देखते हुए इसे संशोधित कर नए सिरे से जारी किया जाएगा।
नीति में प्रदेश में सेंटर आफ एक्सीलेंस की तादाद बढ़ाने की बात कही गयी है। वर्तमान में तीन सेंटरों की जगह इसे बढ़ाकर दस कर दिया जाएगा। अभी उत्तर प्रदेश में संजय गांधी पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में मेडिटेक के नाम से एक सेंटर आफ एक्सीलेंस काम कर रहा है। आईआईटी के नोएडा और कानपुर परिसरों में इन केंद्रों की स्थापना का कार्य चल रहा है। कानपुर में ड्रोन सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है जहां ड्रोन तकनीकी पर काम होगा।






