स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, फोटो- सोशल मीडिया
Swami Avimukteshwaranand Physical Abuse Case: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए कानूनी मुश्किलें अब और गंभीर हो गई हैं। नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के मामले में पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट में चौंकाने वाली पुष्टि हुई है, जिसके बाद अब उनकी गिरफ्तारी की संभावना प्रबल हो गई है।
प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज यौन शोषण के मामले में बुधवार को पुलिस ने दो पीड़ित नाबालिग बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया था। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में दोनों नाबालिग बच्चों के साथ कुकर्म होने की पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट को अब केस डायरी में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने भी दावा किया है कि रिपोर्ट में यौन शोषण के संकेत पूरी तरह स्पष्ट हैं, जिससे आरोपी स्वामी और उनके सहयोगियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश पर झूंसी पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और तीन अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस की अब तक की विवेचना में दो अन्य आरोपियों, अरविंद मिश्रा और प्रकाश उपाध्याय, के नाम भी सामने आए हैं। आरोप है कि माघ मेले के दौरान दो बटुकों के साथ यौन शोषण की घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस अब आश्रम के अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी सघनता से जांच कर रही है।
बड़ी खबर तथाकथित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला आ गई बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट,
सूत्रों के मुताबिक कुकर्म की पुष्टि हुई 25 फरवरी को पुलिस ने पीड़ित नाबालिगों का मेडिकल टेस्ट कराया था। दो डॉक्टरों के पैनल ने प्रयागराज के सरकारी अस्पताल में… pic.twitter.com/pIomCOXjFb — Sunil Mishra ♛ (@MrMishra) February 26, 2026
गिरफ्तारी की बढ़ती आशंका के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है। इस महत्वपूर्ण याचिका पर शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ में सुनवाई होनी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद हाईकोर्ट से राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। यदि अदालत ने अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी, तो उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें किसी भी वक्त गिरफ्तार कर सकती है।
मामले के मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने मीडिया के सामने आकर कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने एक लैपटॉप दिखाते हुए दावा किया कि उनके पास नाबालिगों के यौन शोषण से संबंधित पर्याप्त फोटो और वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं। आशुतोष ने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल संत ही नहीं, बल्कि कई राजनीतिक दलों के बड़े नेता और वीआईपी भी शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने आश्रम में लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये के घोटाले और साक्ष्य (जैसे स्विमिंग पूल आदि) मिटाने की कोशिश करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार, कुल पीड़ितों में लगभग 20 लड़के और कुछ महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं।
दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘सरकार की साजिश’ करार दिया है। उनका कहना है कि वे जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है।
यह भी पढ़ें: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर कल सुनवाई, क्या होगा विरोधियों का नार्को टेस्ट?
उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी दूसरे राज्य की पुलिस से करवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट के साक्ष्यों के बाद उनकी यह दलील अदालत में कितनी प्रभावी होगी, यह कल होने वाली सुनवाई में स्पष्ट हो जाएगा।