यौन उत्पीड़न मामला: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर कल सुनवाई, क्या होगा विरोधियों का नार्को टेस्ट?

Avimukteshwaranand Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट कल अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करेगा। झूंसी थाने में दर्ज मामले के बीच समर्थकों ने आरोप लगाने वालों के नार्को टेस्ट की मांग की है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर कल सुनवाई, फोटो- सोशल मीडिया
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Swami Avimukteshwaranand Controversy: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा विवाद गहराता जा रहा है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज यौन उत्पीड़न के मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, उनके समर्थकों ने अब आरोप लगाने वालों के खिलाफ ही नार्को टेस्ट की मांग कर बड़ी हलचल मचा दी है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की कानूनी मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। प्रयागराज के झूंसी थाने में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए शंकराचार्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है।

शंकराचार्य को राहत मिलेगी?

अदालत की कार्यसूची के अनुसार, इस मामले की सुनवाई शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को होनी तय हुई है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच कोर्ट नंबर 72 में फ्रेश कॉज लिस्ट के 142वें नंबर पर इस केस की सुनवाई करेगी। पूरे संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों की नजरें इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यह तय करेगा कि शंकराचार्य को तत्काल राहत मिलती है या उन्हें कानूनी जांच के कड़े दौर से गुजरना होगा।

समर्थकों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

जैसे-जैसे यह मामला तूल पकड़ रहा है, शंकराचार्य के समर्थक भी उनके बचाव में उतर आए हैं। इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब दिनेश फलाहारी महाराज ने उन पर आरोप लगाने वाले छात्रों और मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय के नार्को टेस्ट कराने की मांग कर दी। उन्होंने इस संबंध में देश की राष्ट्रपति को एक औपचारिक पत्र भी लिखा है। फलाहारी महाराज का तर्क है कि शंकराचार्य के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने मांग की है कि सच और झूठ का फैसला करने के लिए शिकायतकर्ताओं का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाना अनिवार्य है। इस मांग ने मामले को और भी ज्यादा पेचीदा बना दिया है, क्योंकि अब लड़ाई केवल कानूनी दांव-पेंचों तक सीमित नहीं रही, बल्कि साख और षड्यंत्र के दावों तक पहुँच गई है।

आशुतोष ब्रह्मचारी पर भी दर्ज हैं गंभीर आरोप

फलाहारी बाबा ने इस पूरे प्रकरण के पीछे एक गहरे षड्यंत्र का दावा किया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी, जो इस मामले में प्रमुखता से सामने आ रहा है, वह असल में गौकशी कराने वाला एक हिस्ट्रीशीटर रहा है। उनके अनुसार, आशुतोष ने शंकराचार्य की छवि को धूमिल करने के लिए यह पूरा ताना-बाना बुना है।

महाराज ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें खुद भी दूसरे मोबाइल नंबरों से फर्जी केसों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि यह एक बड़ा नेटवर्क है जो संतों को निशाना बना रहा है। इन आरोपों ने जांच की दिशा में एक नया पहलू जोड़ दिया है कि क्या वाकई यह केवल एक आपराधिक मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है।

मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की भूमिका अहम

फिलहाल, गेंद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के पाले में है। यदि कल अदालत से अग्रिम जमानत मिल जाती है, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए यह एक बड़ी प्रारंभिक जीत होगी। हालांकि, नार्को टेस्ट की मांग और 'हिस्ट्रीशीटर' वाले दावों ने पुलिस और प्रशासन पर भी दबाव बढ़ा दिया है कि वे मामले की निष्पक्षता से जांच करें। कल होने वाली सुनवाई न केवल एक व्यक्ति की जमानत से जुड़ी है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में संतों से जुड़े विवादों और उन पर लगने वाले आरोपों की कानूनी दिशा भी तय करेगी।

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