‘नाम छुपाकर कारोबार नहीं करना चाहिए’, क्यूआर कोड विवाद पर एसटी हसन का बयान
समाजवादी पार्टी नेता एसटी हसन ने कांवड़ यात्रा, क्यूआर कोड विवाद, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे समेत कई मुद्दों पर बात की। हसन ने नाप छुपा कर कारोबार करने वालों को गलत ठहराया।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
समाजवादी पार्टी नेता एसटी हसन, फोटो: सोशल मीडिया
समाजवादी पार्टी नेता एसटी हसन ने क्यूआर कोड मामले पर कहा, “मैं हमेशा कहता रहा हूं कि नाम छुपाकर कारोबार नहीं करना चाहिए। इस्लाम धोखा देने की इजाजत नहीं देता। क्यूआर कोड से तो बस यह पता चलता है कि दुकान किसकी है। इसमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
एसटी हसन ने कहा कि जब सियासत ने नफरत को बढ़ावा दिया है तो मुस्लिम समुदाय को नुकसान होता है। तोड़फोड़ के साथ-साथ और समस्याएं पैदा होती हैं और बाद में केस भी मुसलमानों पर ही दर्ज किए जाते हैं। सभी को सच्चाई के साथ काम करना चाहिए जैसा कि मजहब और ईमान कहता है।
धनखड़ के इस्तीफे पर क्या बोले हसन
हसन ने जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर कहा कि उनकी बॉडी लैंग्वेज में कोई कमी नहीं दिख रही थी और उनके इस्तीफे के पीछे का कारण बाद में ही स्पष्ट हो सकेगा। हसन ने कहा कि वो डॉक्टर हैं और उनको बॉडी लैंग्वेज समझने का अनुभव है। ऐसा लगता है कि धनखड़ ने गुस्से में ये कदम उठाया है। शायद किसी ने उनसे कुछ कहा होगा या कुछ गलत करवाने की कोशिश की होगी।
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2006 के ट्रेन ब्लास्ट केस पर क्या बोले हसन?
एसटी हसन ने 2006 के ट्रेन ब्लास्ट केस से जुड़े मुंबई हाईकोर्ट के फैसले पर कहा, “हमारी अदालतें इंसाफ करती हैं। मैंने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था कि आतंकवाद के इल्जाम में एक व्यक्ति को 28 साल तक जेल में रखा गया और बाद में वह बेगुनाह साबित हुआ। अब उसकी जिंदगी तबाह हो चुकी थी। गृह मंत्रालय से मैंने सवाल किया था कि जिस अधिकारी ने उसे जेल भेजा उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? यूएपीए जैसे कानूनों में अधिकारियों को इतनी छूट है कि वे बेगुनाहों को जेल भेज देते हैं। अगर किसी के साथ अन्याय होता है तो दोषी अधिकारियों की पेंशन बंद होनी चाहिए। उन्हें भी कुछ समय के लिए जेल में डालना चाहिए। इसके साथ ही तत्कालीन सरकारों को भी ऐसे मामलों में माफी मांगनी चाहिए।”
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तोड़फोड़ और हिंसा करने वाले शिव भक्त नहीं हो सकते
हसन ने कांवड़ यात्रा को लेकर कहा, “जो लोग तोड़फोड़ और हिंसा करते हैं, वे शिव भक्त नहीं हो सकते। भोले बाबा शांतिप्रिय हैं, उनकी शिक्षाएं हिंसा की इजाजत नहीं देतीं। कुछ लोग हिंदू-मुस्लिम तनाव पैदा करके सांप्रदायिक पार्टियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ऐसे तत्वों को चिन्हित कर सजा देनी चाहिए, ताकि सच्चे कांवड़ियों की छवि खराब न हो।”
