राफेल जेट (Image- Social Media)
India Rafale Jets Deal: भारत की सैन्य ताकत को और मजबूती मिलने जा रही है। रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। साथ ही भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I समुद्री टोही विमान खरीदने को भी हरी झंडी मिल गई है।
यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई DAC बैठक में लिया गया। अब इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है।
करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद में से एक मानी जा रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले इस फैसले को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 की मानी जाती है। पुराने विमानों के रिटायर होने के कारण आधुनिक फाइटर जेट्स की तत्काल आवश्यकता थी। इस डील से स्क्वाड्रन संख्या बढ़कर लगभग 35-36 तक पहुंच सकती है।
भारतीय वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल विमान दो स्क्वाड्रन में शामिल हैं। दिसंबर 2024 में अंतिम ‘सी’ वेरिएंट की डिलीवरी पूरी हुई थी।
राफेल एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री हमलों में सक्षम है। यह स्कैल्प (SCALP) क्रूज मिसाइल, मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल, हैमर प्रिसिजन गाइडेड हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और आधुनिक रडार से लैस है। राफेल विमानों का इस्तेमाल भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी किया था, जिसमें सटीक हमलों की क्षमता प्रदर्शित हुई थी। वायुसेना के उपप्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर के अनुसार, राफेल जैसे आधुनिक जेट्स से वायुसेना की क्षमता कई गुना बढ़ेगी और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटना आसान होगा।
भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I पोसाइडन विमान भी मंजूर किए गए हैं। यह बोइंग द्वारा निर्मित लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान हैं, जो दुश्मन की पनडुब्बियों, जहाजों और हवाई गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम हैं। भारत के पास पहले से 12 P-8I विमान हैं। नए विमानों के जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता और मजबूत होगी।
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यह सौदा गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट आधार पर होगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। डील में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्थानीय विनिर्माण को प्राथमिकता दी गई है। पिछले वर्ष भारत और फ्रांस के बीच डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच हुए समझौतों से इस प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।