खामोश हुई दूरदर्शन के सुनहरे दौर की आवाज, सरला माहेश्वरी का 71 साल की उम्र में निधन, मीडिया जगत छाया मातम
Sarla Maheshwari Death: दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं और टीवी समाचार जगत के सुनहरे दौर का एक प्रमुख चेहरा थीं।
- Written By: अभिषेक सिंह
सरला माहेश्वरी व दूरदर्शन का पुराना लोगो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sarla Maheshwari: दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं और टीवी समाचार जगत के सुनहरे दौर का एक प्रमुख चेहरा थीं। 1980 और 90 के दशक में अपनी शांत शैली और सौम्य व्यक्तित्व से उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उनका अंदाज आज के शोरगुल वाले टीवी न्यूज से बिल्कुल अलग था, जिसे लोग आज भी याद करते हैं।
माहेश्वरी 1976 से लेकर 2005 तक टीवी समाचारों का जाना-पहचाना चेहरा बनी रहीं। उन्होंने सलमा सुल्तान, मीनू तलवार, शम्मी नारंग और गीतांजलि अय्यर जैसे दिग्गजों के साथ काम किया। उनका नाम सुनते ही भारत में प्रसारण जगत के श्वेत-श्याम से रंगीन होने के सफर की यादें ताजा हो जाती हैं। यह वह दौर था जब प्रसारण दिन में कुछ घंटों तक ही सीमित होता था और देखने के लिए केवल एक ही चैनल उपलब्ध होता था।
शम्मी नारंग ने दी निधन की ख़बर
उनके निधन की खबर सबसे पहले उनके सह-समाचार वाचक और मित्र शम्मी नारंग ने दी। नारंग ने सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि सरला माहेश्वरी न केवल दिखने में सुंदर थीं, बल्कि हृदय से भी उदार थीं। उन्होंने कहा कि भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी और वह ज्ञान का भंडार थीं।
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दूरदर्शन ने भी दी श्रद्धांजलि
दूरदर्शन नेशनल ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति ने उन्हें विशेष स्थान दिलाया था। उनके सहयोगियों और दर्शकों ने उनकी विशिष्ट सीधा पल्ला साड़ी पहनने की शैली को याद किया। पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वह उस दौर का चेहरा थीं जब टीवी पर अपनी बात रखने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं होती थी। उनकी सहयोगी रिनी साइमन खन्ना ने उन्हें शालीनता और मर्यादा की प्रतीक बताया।
एंबुलेंस से पहुंची थी मतदान केंद्र
सरला माहेश्वरी ने पिछले साल फरवरी में खराब सेहत के बावजूद एम्बुलेंस से मतदान केंद्र पहुंचकर मिसाल पेश की थी। उन्होंने कहा था कि मतदान एक स्वैच्छिक प्रयास है जिसे हर नागरिक को अवश्य करना चाहिए। बहुत कम लोग जानते हैं कि मीडिया में आने से पहले, 1970 के दशक में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी भी पढ़ाई थी।
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खेल लेखक वी. कृष्णास्वामी ने उन्हें एक बेहद धैर्यवान और मिलनसार शिक्षिका के रूप में याद किया। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने उनके निधन को टेलीविजन पत्रकारिता के एक स्वर्णिम युग का अंत बताया है। केरल कांग्रेस ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एक पूरी पीढ़ी शाम के बुलेटिन में उनकी शांत मौजूदगी को देखते हुए बड़ी हुई है।
